बिहार में राज्यसभा की जंग: NDA की गुप्त बैठक में क्या खिचड़ी पकी? सम्राट चौधरी और संजय झा के दांव से विपक्ष में खलबली

Bihar News: बिहार की सियासी फिजाओं में राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी अचानक तेज हो गई है। एनडीए (NDA) के दिग्गज नेताओं की एक बंद कमरे में हुई गुप्त बैठक ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और भाजपा नेता संजय सरावगी के बीच हुई इस मुलाकात को राज्यसभा वोटिंग की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। संख्या बल पक्ष में होने के बावजूद एनडीए कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहता है।

वोटिंग से पहले अभेद्य किलेबंदी की तैयारी

राज्यसभा की खाली सीटों के लिए होने वाली वोटिंग को लेकर एनडीए अपने विधायकों को एकजुट रखने की कवायद में जुट गया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मतदान के दिन किसी भी प्रकार की ‘क्रॉस वोटिंग’ की गुंजाइश को खत्म करना था। संजय झा और सम्राट चौधरी ने मिलकर एक ऐसा खाका तैयार किया है, जिससे विपक्ष की सेंधमारी की कोशिशें नाकाम हो सकें। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सभी विधायकों को वोट डालने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

संजय झा और सम्राट चौधरी का मास्टरप्लान

बैठक में जेडीयू और भाजपा के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया। संजय झा ने सीट शेयरिंग और जीत के अंतर को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। वहीं सम्राट चौधरी ने भाजपा विधायकों की उपस्थिति और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ली है। एनडीए की नजर निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों पर भी टिकी है। इस रणनीतिक बैठक ने साफ कर दिया है कि सत्ता पक्ष इस चुनाव को महज औपचारिकता नहीं मान रहा है।

विपक्ष की घेराबंदी और संख्या बल का खेल

बिहार विधानसभा के मौजूदा गणित को देखें तो एनडीए का पलड़ा भारी नजर आता है। हालांकि, विपक्ष की ओर से आरजेडी (RJD) भी अपनी गोटियां सेट करने में लगी है। इसी खतरे को भांपते हुए संजय सरावगी जैसे चुनावी रणनीतिकारों को फ्रंट लाइन पर रखा गया है। बैठक के बाद नेताओं के चेहरे पर आत्मविश्वास दिखा, लेकिन उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी। यह चुप्पी ही विपक्ष की बेचैनी बढ़ाने के लिए काफी है।

क्या होगा इस बैठक का परिणाम?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक के बाद एनडीए अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी कर सकता है। मतदान के दिन विधायकों को समूहों में बांटकर विधानसभा ले जाने की योजना है। इस सक्रियता ने यह संदेश दे दिया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा नेतृत्व हर एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है। आने वाले कुछ घंटों में बिहार की राजनीति में कई बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।

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