India News: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आज का दिन बेहद चिंताजनक रहा क्योंकि रुपया अपने अब तक के सबसे खराब स्तर पर पहुंच गया है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में ही रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.40 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकालने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है। आम आदमी के लिए इसका सीधा मतलब है कि अब विदेश यात्रा, शिक्षा और आयात होने वाली तमाम वस्तुएं महंगी हो जाएंगी।
विदेशी निवेशकों ने मोड़ा मुंह
शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बिकवाली तेज कर दी है। भारतीय बाजारों से भारी मात्रा में फंड बाहर जाने के कारण रुपये पर दबाव बढ़ गया है। जब विदेशी निवेशक अपना निवेश निकालकर डॉलर वापस ले जाते हैं, तो बाजार में डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होता है। जानकारों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के चलते निवेशक अब सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
कच्चा तेल और वैश्विक कारण
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने आग में घी डालने का काम किया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका भुगतान डॉलर में होता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपये की वैल्यू घट गई। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की नीतियों ने भी वैश्विक स्तर पर डॉलर को मजबूत किया है, जिससे भारतीय मुद्रा सहित कई उभरते देशों की करेंसी धराशायी हो गई है।
आपकी जेब पर क्या होगा असर?
रुपये के कमजोर होने का असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहता। यह आपकी रसोई और खर्चों को भी प्रभावित करता है। भारत बड़ी मात्रा में खाद्य तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी का आयात करता है। रुपया गिरनें से इन वस्तुओं की लागत बढ़ जाएगी, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है। मध्यम वर्ग के लिए स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य विदेशी उपकरण खरीदना अब पहले से ज्यादा खर्चीला साबित होगा।


