Washington News: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी पीटर नवारो ने भारत को लेकर एक बेहद अजीबोगरीब बयान दिया है। उन्होंने भारत पर अमेरिकी संसाधनों के मुफ्त इस्तेमाल का बेतुका आरोप लगाया है। नवारो ने सवाल उठाया है कि जब ChatGPT अमेरिका की बिजली और जमीन का इस्तेमाल करता है, तो भारत जैसे देश इसका मुफ्त में मजा क्यों ले रहे हैं? यह बयान अब कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
तकनीक के जरिए भारत को घेरने की साजिश
नवारो का यह बयान महज एक टिप्पणी नहीं, बल्कि भारत को डिजिटल मोर्चे पर घेरने की कोशिश मानी जा रही है। उन्होंने स्टीव बैनन के शो पर कहा कि अमेरिकी संसाधनों का बिल वहां की जनता भर रही है, जबकि बाहरी देश इसका फायदा उठा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तर्क न केवल तकनीकी रूप से गलत है, बल्कि अहंकार से भरा है। ऐसा लगता है कि अमेरिका भारत को एक साझेदार नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर चलने वाला बाजार बनाना चाहता है।
टैरिफ के बाद अब AI पर नई धौंस
ट्रंप प्रशासन की वापसी के साथ ही भारत पर दबाव बनाने का सिलसिला तेज हो गया है। हाल ही में रूसी तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत पर 50 फीसदी का भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया गया था। जब भारत इस आर्थिक दबाव के आगे नहीं झुका, तो अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेवाओं को हथियार बनाया जा रहा है। नवारो का ताजा बयान उसी खींचतान का नतीजा लग रहा है, जो व्यापारिक समझौतों में भारत को न दबा पाने की वजह से पैदा हुई है।
नवारो का भारत विरोधी पुराना इतिहास
पीटर नवारो का भारत के खिलाफ जहर उगलना कोई नई बात नहीं है। वह पहले भी भारतीय नेतृत्व पर आपत्तिजनक और नस्लीय टिप्पणियां कर चुके हैं। नवारो ने यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ बताकर करोड़ों भारतीयों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी। इसके अलावा, वह भारत को रूसी तेल के लिए ‘लॉन्ड्रोमैट’ (काले धन को सफेद करने वाली जगह) कहकर भी अपमानित कर चुके हैं। उनकी ऐसी बातें अक्सर कूटनीतिक तनाव को बढ़ाती हैं।
सिलिकॉन वैली का कड़वा सच
तकनीकी जानकारों का मानना है कि नवारो का तर्क पूरी तरह खोखला है। इंटरनेट और एआई सेवाएं ग्लोबल डेटा नेटवर्क पर काम करती हैं और कंपनियां इसके लिए यूजर से पैसा कमाती हैं। सच्चाई यह है कि अगर भारतीय इंजीनियर और भारत का विशाल डेटा बाजार अपनी सेवाएं रोक दें, तो अमेरिका की सिलिकॉन वैली मुश्किल में आ जाएगी। अमेरिका की तकनीकी तरक्की में भारत का योगदान इतना बड़ा है कि उसे नजरअंदाज करके कोई भी ‘बिजली का साहूकार’ नहीं बन सकता।

