Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। अब यहाँ बच्चे घरों के बजाय अस्पतालों में जन्म ले रहे हैं। सरकार की ताजा रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। दिल्ली में संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) का आंकड़ा 96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा महिलाओं में बढ़ती हेल्थ अवेयरनेस को दर्शाता है।
क्यों जरूरी है अस्पताल में डिलीवरी?
हेल्थ एक्सपर्ट्स अस्पताल में प्रसव को मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित मानते हैं। वहां ट्रेंड डॉक्टर और नर्स हर वक्त मौजूद रहते हैं। किसी भी इमरजेंसी में तुरंत इलाज मिल जाता है। आधुनिक मेडिकल सुविधाओं के कारण जान का खतरा काफी कम हो जाता है। इसलिए डॉक्टर्स संस्थागत डिलीवरी को जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए सबसे बेहतर मानते हैं।
सरकारी योजनाओं का दिखा बड़ा असर
सरकार की कोशिशें अब धरातल पर रंग ला रही हैं। दिल्ली में फ्री डिलीवरी सुविधा और जननी सुरक्षा योजना ने बड़ा रोल निभाया है। बेहतर एम्बुलेंस सर्विस ने भी अस्पतालों तक पहुंच आसान कर दी है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अब रेगुलर जांच, मुफ्त दवाइयां और पोषण की सलाह मिल रही है। इन सुविधाओं ने सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा बढ़ाया है।
शिशुओं की जान बचना हुआ आसान
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, संस्थागत डिलीवरी बढ़ने से शिशु मृत्यु दर में भारी कमी आई है। अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों को तुरंत मेडिकल केयर मिल जाती है। उन्हें समय पर जरूरी वैक्सीनेशन और न्यूबॉर्न केयर दी जाती है। इससे नवजात की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यह बदलाव दिल्ली के हेल्थ सिस्टम की एक बड़ी जीत है।
