New Delhi News: कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने Supreme Court के एक हालिया फैसले की कड़ी आलोचना की है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सीपीआई (एम) ने कहा कि बिना किसी दोषसिद्धि के पांच साल से अधिक समय तक जेल में रखना गलत है। पार्टी ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है। इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।
जमानत नियम है, जेल नहीं
पार्टी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी कर अपनी नाराजगी जाहिर की। सीपीआई (एम) ने कहा कि Supreme Court को “जमानत नियम है, जेल नहीं” के सिद्धांत को याद रखना चाहिए। यूएपीए (UAPA) जैसे कठोर कानून के तहत बिना मुकदमे के लंबी हिरासत ठीक नहीं है। यह सीधे तौर पर स्वतंत्रता और शीघ्र सुनवाई के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करता है। पार्टी का आरोप है कि इस कानून का इस्तेमाल असहमति की आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है।
पांच अन्य को मिली राहत
यह पूरा मामला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़ा है। Supreme Court ने सोमवार को इसी केस में पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है। कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर और शिफा उर रहमान को राहत दी है। इसके साथ ही मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को भी जमानत मिल गई है। लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को अभी जेल में ही रहना होगा।
राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग
वामपंथी पार्टी ने कहा कि यूएपीए का निरंतर उपयोग दमन का एक चिंताजनक पैटर्न दर्शाता है। यह चयनात्मक न्याय (Selective Justice) की ओर इशारा करता है। सीपीआई (एम) ने सभी राजनीतिक कैदियों की तत्काल रिहाई की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि जब तक दोष साबित नहीं होता, तब तक किसी को इतने लंबे समय तक कैद रखना अन्याय है। Supreme Court के इस फैसले पर बहस छिड़ गई है।
