New Delhi News: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत में रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति को लेकर खतरे की घंटी बज गई है। मंगलवार सुबह मुंद्रा पोर्ट पर एलपीजी से लदा एक जहाज जरूर पहुंचा, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि संकट अभी टला नहीं है। उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों ने संकेत दिए कि यदि अगले कुछ दिनों में नए टैंकर नहीं पहुंचे, तो किल्लत बढ़ सकती है। भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरुमध्य मार्ग से आता है। इस मार्ग पर तनाव के कारण एक दर्जन भारतीय जहाज फंसे हुए हैं।
होर्मुज मार्ग पर फंसा संकट और ईरान से वार्ता
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने देश में एलपीजी की स्थिति को चिंताजनक बताया है। होर्मुज जलडमरुमध्य में फंसे एलपीजी और क्रूड ऑयल टैंकरों को निकालने के लिए विदेश मंत्रालय ईरान के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। मंगलवार सुबह मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचे जहाज से केवल अस्थायी राहत मिली है। देश को रोजाना करीब 60 हजार टन गैस की जरूरत होती है, जबकि पहुंचे हुए जहाजों की क्षमता इसके मुकाबले काफी कम है। जब तक होर्मुज मार्ग पूरी तरह नहीं खुलता, दीर्घकालिक राहत मिलना मुश्किल है।
घरेलू उत्पादन और विदेशी खरीद में चुनौतियां
संकट को देखते हुए सरकार ने रिफाइनरियों को घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। रिफाइनरियों ने उत्पादन में 38 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है, लेकिन इसकी भी एक सीमा है। सरकार ने अमेरिका और रूस से भी गैस खरीदने की योजना बनाई है। हालांकि, अमेरिका से जहाज आने में चार से पांच हफ्ते लगेंगे। दूसरी ओर, चीन की आक्रामक बिडिंग के कारण भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे सौदों का सामना करना पड़ रहा है।
PNG पाइपलाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर
एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने अब पीएनजी (PNG) पाइपलाइन बिछाने के काम को तेज कर दिया है। सभी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे पाइपलाइन बिछाने के पुराने प्रस्तावों को तुरंत मंजूरी दें। नए प्रस्तावों को 24 घंटे के भीतर क्लियरेंस देने की बात कही गई है। सरकार का लक्ष्य 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन धारकों को पाइपलाइन गैस की सुविधा से जोड़ना है। अधिकारियों को नियमों को उदार बनाने और पीएनजी नेटवर्क का विस्तार करने के लिए विशेष नियुक्तियां करने को कहा गया है।


