World News: ईरान और इजराइल के बीच भड़का युद्ध अब एक भयानक पर्यावरणीय त्रासदी में बदल गया है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के तेल ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों ने आसमान में जहर घोल दिया है। तेहरान और उसके आसपास मीलों तक सिर्फ काले धुएं का गुबार छाया हुआ है। सूरज की रोशनी पूरी तरह गायब हो गई है और लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि ईरान में तेजाबी बारिश (एसिड रेन) की गंभीर चेतावनी जारी कर दी गई है। यह खतरा अब सिर्फ ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
हवाओं के रुख से भारत और पाकिस्तान पर मंडराया बड़ा खतरा
फिलहाल उत्तर-पश्चिमी हवाएं ईरान से पाकिस्तान के बलूचिस्तान की तरफ बहुत तेजी से बह रही हैं। इस खतरे को देखते हुए पाकिस्तान के मौसम विभाग ने पहले ही हाई अलर्ट जारी कर दिया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि तेल जलने से निकला जहरीला धुआं पांच से दस दिन के अंदर दो से तीन हजार किलोमीटर दूर तक फैल सकता है। हिमालय पर्वत की मौजूदगी के कारण भारत को सीधा खतरा थोड़ा कम है। लेकिन अगर ऊपरी वायुमंडल में हवा की गति तेज हुई, तो हालात बिगड़ सकते हैं। इस जहरीले धुएं के महीन कण उड़कर गुजरात, राजस्थान और पंजाब के आसमान तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
बंजर होगी जमीन और तेजी से बढ़ेंगे सांस के मरीज
इस खतरनाक तेजाबी बारिश का प्रभाव बहुत डरावना और लंबे समय तक रहने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि मिट्टी में घुलने वाला जहर अगले दस से बीस साल तक खेतों को बर्बाद करेगा। इससे फसलों की पैदावार में दस से पंद्रह प्रतिशत तक की भारी कमी आएगी। जहरीली हवा के कारण लोगों में सांस की बीमारियां बीस से तीस प्रतिशत तक बढ़ने की पूरी आशंका है। कमजोर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह हवा जानलेवा साबित हो सकती है। सीसा और पारा जैसी भारी धातुएं पानी और मिट्टी के रास्ते हमारे भोजन में शामिल हो जाएंगी। यह धीमा जहर इंसानों के डीएनए तक को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
ग्लोबल वॉर्मिंग में होगा भारी इजाफा, क्या हैं बचाव के रास्ते?
दुनिया पहले ही ग्लोबल वॉर्मिंग की 1.5 डिग्री सेल्सियस की खतरनाक सीमा को पार कर चुकी है। इस युद्ध के कारण होने वाला भारी उत्सर्जन वैश्विक तापमान को 2.5 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर ले जा सकता है। ईरान में तेल संकट के कारण दुनिया की निर्भरता एक बार फिर कोयले पर बढ़ेगी। इससे तापमान बढ़ने की रफ्तार और तेज होगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ईरान को तुरंत प्रभावित मिट्टी को चूने से साफ करना चाहिए। लोगों को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य शिविर लगाए जाने चाहिए। भारत को सतर्क रहते हुए अपनी पश्चिमी सीमा पर वायु गुणवत्ता की निगरानी मजबूत करनी होगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘जलवायु शांति कोष’ बनाने की सख्त जरूरत है। पर्यावरण को जानबूझकर बर्बाद करने वालों पर अब अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुकदमा चलना ही चाहिए।

