Himachal News: हिमाचल प्रदेश के माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। बच्चों के स्कूल एडमिशन को लेकर सालों से चला आ रहा उम्र का कन्फ्यूजन अब हमेशा के लिए खत्म हो गया है। शिक्षा विभाग ने नर्सरी से लेकर पहली कक्षा तक के दाखिले के लिए बेहद सख्त और स्पष्ट नियम लागू कर दिए हैं। अब एडमिशन के लिए 30 सितंबर की तारीख को कट-ऑफ माना जाएगा। यह नया नियम सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। अब कोई भी स्कूल मनमर्जी से दाखिला देने से मना नहीं कर सकेगा।
मनमानी करने वाले प्राइवेट स्कूलों पर कसेगा शिकंजा
अक्सर प्राइवेट स्कूल उम्र का बहाना बनाकर बच्चों को एडमिशन देने से मना कर देते हैं। अब ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को एक बड़ा हथियार दे दिया है। अगर कोई स्कूल नए नियमों को मानने से इनकार करता है, तो माता-पिता सीधे जिले के उपनिदेशक (प्राथमिक शिक्षा) से शिकायत कर सकते हैं। इस मामले में उपनिदेशक का फैसला ही अंतिम माना जाएगा। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि मनमानी करने वाले स्कूलों पर ‘आरटीई एचपी नियम 2025’ के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
30 सितंबर का कट-ऑफ नियम क्या है?
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार दाखिले की उम्र अब 30 सितंबर के आधार पर गिनी जाएगी। इसे इस तरह समझा जा सकता है:
- अगर कोई बच्चा 30 सितंबर तक संबंधित कक्षा की उम्र पूरी कर लेता है, तो उसे उसी साल एडमिशन मिलेगा।
- उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी बच्चे का जन्म 15 अप्रैल 2023 को हुआ है।
- वह बच्चा शैक्षणिक सत्र 2026-27 में बालवाटिका-1 (नर्सरी) में एडमिशन ले सकता है।
- कारण यह है कि 30 सितंबर 2026 से पहले वह बच्चा 3 साल की उम्र पूरी कर लेगा।
पहले से पढ़ रहे बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकेगी
शिक्षा विभाग ने उन बच्चों का भी पूरा ध्यान रखा है जो पहले से प्री-प्राइमरी (नर्सरी/केजी) में पढ़ रहे हैं। जो बच्चे पहले से नामांकित हैं, वे बिना किसी रुकावट के अगली कक्षा में जाएंगे।
- शर्त सिर्फ इतनी है कि बच्चा 30 सितंबर 2026 तक अगली कक्षा की उम्र पूरी करता हो।
- मान लीजिए एक बच्चे का जन्म 25 अगस्त 2020 को हुआ है।
- वह 2026-27 के सत्र में बालवाटिका-दो या तीन में पढ़ रहा है।
- वह बच्चा सीधे कक्षा-1 में एडमिशन ले सकेगा क्योंकि 30 सितंबर 2026 से पहले वह 6 साल का हो जाएगा।
अंतिम फैसला अभिभावकों के हाथ में होगा
यह व्यवस्था बच्चों को राहत देने के लिए बनाई गई है। लेकिन शिक्षा विभाग ने एक बात बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। पहले से पढ़ रहे बच्चों को अगली कक्षा में भेजने (प्रमोट करने) का अंतिम फैसला माता-पिता का ही होगा। बच्चे को जंप करवाने के लिए अभिभावकों की सहमति सबसे जरूरी है। अगर माता-पिता चाहेंगे, तभी उनके बच्चे को अगली कक्षा में भेजा जाएगा। इस नियम से अभिभावकों को स्कूल प्रबंधन के दबाव से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।


