Himachal News: हम सभी भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को बचपन से सुनते आ रहे हैं। लेकिन क्या आपको यशोदा की बेटी के बारे में पता है? जिस रात मथुरा में श्री कृष्ण का जन्म हुआ, ठीक उसी वक्त गोकुल में भी एक बच्ची जन्मी थी। नंद बाबा ने दोनों बच्चों की अदला-बदली की थी। कंस ने श्री कृष्ण के धोखे में उस बच्ची को मारने की कोशिश की। लेकिन वह चमत्कारिक रूप से बच निकली। आइए जानते हैं कि यशोदा की वह बेटी आखिर कौन थी और उसका क्या हुआ।
श्री कृष्ण के साथ हुआ था उस देवी का जन्म
भागवत पुराण के मुताबिक, मथुरा की जेल में देवकी ने श्री कृष्ण को आठवें पुत्र के रूप में जन्म दिया। उसी समय गोकुल में यशोदा के घर एक कन्या का जन्म हुआ। ईश्वर के आदेश पर वासुदेव जी नन्हे श्री कृष्ण को टोकरी में लेकर यमुना पार गए। वे गोकुल पहुंचे और वहां बच्चों को बदल दिया। वासुदेव ने यशोदा की बेटी योगमाया को उठाया और श्री कृष्ण को वहां सुला दिया। इसके बाद वे उस कन्या को लेकर वापस मथुरा की जेल में आ गए।
जब कंस के हाथ से छूटकर आकाश में उड़ गई कन्या
कंस को खबर मिली कि देवकी की आठवीं संतान पैदा हो चुकी है। वह तुरंत उसे मारने के लिए कारागार पहुंचा। कंस ने उस कन्या को श्री कृष्ण समझकर पत्थर पर पटकना चाहा। तभी एक चमत्कार हुआ। वह बच्ची कंस के हाथ से छूटकर आकाश में उड़ गई। उसने वहां अष्टभुजा देवी का रूप धारण कर लिया। देवी ने गरजते हुए कहा, “अरे मूर्ख! तुझे मारने वाला श्री कृष्ण तो जन्म ले चुका है और वह सुरक्षित है।”
आज विंध्यवासिनी के नाम से पूजी जाती हैं वो कन्या
कंस को चेतावनी देने के बाद वह कन्या विंध्य पर्वत पर चली गईं। आज दुनिया उन्हें ‘विंध्यवासिनी देवी’ के नाम से पूजती है। श्री कृष्ण की इस बहन को योगमाया, कात्यायनी और चामुंडा जैसे नामों से भी जाना जाता है। नवरात्रि में इनकी विशेष पूजा होती है। मान्यता है कि देवताओं ने देवी से स्वर्ग लौटने की प्रार्थना की थी। लेकिन देवी ने भक्तों के लिए धरती पर ही रहना स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि वे भक्तों की आस्था के अनुसार दर्शन देंगी। इसके बाद देवताओं ने विंध्याचल में उनका शक्तिपीठ स्थापित किया।
