Sports News: चार जनवरी 2024 को टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे छोटा मैच खेला गया। केप टाउन के न्यूलैंड्स में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए इस टेस्ट में सिर्फ 642 गेंदें फेंकी गईं। महज एक दिन और कुछ घंटों में पूरा हुए इस मैच में कुल 33 विकेट गिरे। भारत ने दक्षिण अफ्रीका को सात विकेट से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
यह मैच टेस्ट क्रिकेट के 149 साल के इतिहास का सबसे छोटा मैच बन गया। दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। यह निर्णय उनके लिए महंगा साबित हुआ। भारतीय गेंदबाजों ने तेज गति वाली पिच पर घरेलू टीम का सफाया कर दिया।
सिराज का कोहराम
मोहम्मद सिराज नेपहली पारी में शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने नौ ओवर में सिर्फ 15 रन देकर छह विकेट झटके। सिराज ने दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों को पिच पर बिल्कुल असहज कर दिया। जसप्रीत बुमराह और मुकेश कुमार ने भी दो-दो विकेट लिए। घरेलू टीम की पहली पारी सिर्फ 55 रन पर समाप्त हो गई।
दक्षिण अफ्रीका के आठ बल्लेबाज ढाई रन तक नहीं बना सके। केवल काइल वेरेय्ने और मार्को यान्सेन ने दोहरे अंकों में स्कोर किया। पूरी टीम 23.2 ओवर में ही ऑल आउट हो गई। यह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की यादगार पारियों में से एक बन गई।
भारत की संघर्षपूर्ण पारी
भारत कीबल्लेबाजी भी बहुत बेहतर नहीं रही। टीम ने पहली पारी में 153 रन बनाए। विराट कोहली ने 46 और रोहित शर्मा ने 39 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली। इन दोनों की साझेदारी मैच का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। बाकी बल्लेबाज पिच की चुनौती से निपट नहीं सके।
भारत की पारी में एक अजीब रिकॉर्ड बना। टीम ने 153 रन के स्कोर पर लगातार छह विकेट गंवाए। पांचवें विकेट के बाद अगले छह बल्लेबाज बिना कोई रन बनाए आउट हो गए। यह टेस्ट क्रिकेट में एक दुर्लभ घटना थी। पिच पर गेंदबाजों का दबदबा स्पष्ट था।
मार्करम का शानदार शतक
दूसरीपारी में दक्षिण अफ्रीका के ओपनर एडन मार्करम ने शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने मुश्किल पिच पर 106 रनों की पारी खेली। मार्करम ने 17 चौके लगाकर भारतीय गेंदबाजों को चुनौती दी। उनका यह शतक मैच की सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धि रही।
हालांकि मार्करम को अन्य बल्लेबाजों से सहयोग नहीं मिला। दूसरी पारी में टीम 176 रन बना सकी। इस तरह भारत के सामने जीत का लक्ष्य सिर्फ 79 रन रह गया। मार्करम के प्रयासों के बावजूद टीम बड़ा स्कोर नहीं बना पाई।
भारत की आसान जीत
भारत ने79 रनों के लक्ष्य का पीछा तीन विकेट खोकर पूरा किया। यशस्वी जयसवाल ने 28 रनों की तेज पारी खेली। शुभमन गिल और विराट कोहली ने भी दोहरे अंकों में स्कोर किया। भारतीय टीम ने आखिरी दिन के लंच से पहले ही मैच जीत लिया।
यह जीत भारत के लिए विशेष महत्व रखती थी। टीम ने दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट सीरीज बराबर की। दो मैचों की इस सीरीज का पहला टेस्ट दक्षिण अफ्रीका ने जीता था। केप टाउन में हुई यह जीत भारतीय टीम के लिए गर्व का क्षण थी।
पिच पर बहस
इस मैच केबाद पिच की गुणवत्ता को लेकर बहस शुरू हो गई। विशेषज्ञों ने इसे अत्यधिक गेंदबाजी के अनुकूल बताया। ऐसी पिच पर टेस्ट मैच का आयोजन उचित नहीं माना गया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने इस पिच को ‘असंतोषजनक’ रेटिंग दी।
कई पूर्व क्रिकेटरों ने पिच तैयार करने वाले क्यूरेटर की आलोचना की। उनका कहना था कि ऐसी पिच पर बल्लेबाजी बेहद मुश्किल हो जाती है। टेस्ट क्रिकेट में बल्ले और गेंद के बीच संतुलन जरूरी है। यह मैच इस संतुलन के बिगड़ने का उदाहरण बना।
ऐतिहासिक महत्व
यह मैच टेस्ट क्रिकेट केइतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। इससे पहले कभी इतने कम समय में टेस्ट मैच पूरा नहीं हुआ था। 1932 में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए मैच में 656 गेंदें फेंकी गई थीं। केप टाउन टेस्ट ने यह रिकॉर्ड तोड़ दिया।
क्रिकेट प्रेमियों ने इस मैच को विरोधाभासी प्रतिक्रिया दी। कुछ ने इसे गेंदबाजी का उत्कृष्ट नमूना बताया। वहीं कुछ ने टेस्ट क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंता जताई। मैच ने क्रिकेट की गुणवत्ता पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए।

