Delhi News: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में जमीन के बदले नौकरी मामले की सुनवाई ने लालू परिवार की अंदरूनी खाई एक बार फिर उजागर कर दी। लालू यादव समेत 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय होने के दिन दोनों बेटों का आमना सामना हुआ। तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव के बीच तनाव कैमरों में कैद हो गया। यह दृश्य कानूनी कार्रवाई से ज्यादा चर्चा में रहा।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, उनकी बहन मीसा भारती और बड़े बेटे तेज प्रताप यादव कोर्ट में शारीरिक रूप से पेश हुए। लालू यादव और राबड़ी देवी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। लेकिन सबकी नजर दोनों भाइयों के बीच के मूक संवाद पर थी। कोर्ट के गलियारे में दोनों का सामना हुआ और तनाव साफ झलका।
लिफ्ट के बाहर हुआ मौन सामना
जब तेजस्वीयादव लिफ्ट से बाहर निकले तो सामने तेज प्रताप यादव खड़े थे। तेजस्वी ने बड़े भाई की ओर देखा और इशारों में हालचाल पूछा। इसके जवाब में तेज प्रताप के चेहरे पर साफ नाराजगी दिखाई दी। उनका चेहरा लाल था और भाव सख्त। बिना कुछ कहे वे आगे बढ़ गए।
यह छोटा सा मुठभेड़ पूरे परिवार के बीच बढ़ते तनाव का संकेत था। कैमरों ने इस पल को कैद कर लिया। दोनों भाइयों के बीच औपचारिक बातचीत भी नहीं हुई। यह दृश्य राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने इशारों और नजरों में छिपे अर्थ समझने की कोशिश की।
‘जयचंद’ तंज की राजनीतिक पृष्ठभूमि
राजनीतिक विश्लेषकोंका मानना है कि तेज प्रताप की नाराजगी सिर्फ भाई तेजस्वी से नहीं है। उनका गुस्सा तेजस्वी के करीबी माने जाने वाले संजय यादव को लेकर भी है। तेज प्रताप कई बार सार्वजनिक मंचों से ‘जयचंद’ शब्द का इस्तेमाल कर चुके हैं।
हालांकि उन्होंने कभी सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे संजय यादव के लिए तंज माना जाता है। दिलचस्प बात यह रही कि कोर्ट में तेजस्वी जहां भी गए, संजय यादव उनके साथ मौजूद रहे। यह दृश्य तेज प्रताप की नाराजगी को और बढ़ाता नजर आया।
पिछले मुठभेड़ों की याद
यह पहलीबार नहीं है जब दोनों भाइयों के बीच तनाव सार्वजनिक हुआ है। हाल ही में विधानसभा चुनाव के दौरान पटना एयरपोर्ट पर भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला था। उस वक्त तेज प्रताप यादव एक यूट्यूबर के साथ शॉपिंग कर रहे थे।
तेजस्वी यादव के वहां पहुंचने पर माहौल में खिंचाव आ गया था। तेजस्वी के हल्के फुल्के अंदाज और तेज प्रताप के गंभीर चेहरे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस घटना ने भी परिवार के अंदरूनी हालात की झलक दिखाई थी।
परिवार से बाहर, फिर भी सुर्खियों में
तेज प्रताप यादव कोलालू यादव ने पार्टी और परिवार से छह साल के लिए बाहर कर दिया है। इसके बावजूद लालू परिवार से जुड़ी हर बड़ी घटना में उनकी मौजूदगी सुर्खियां बटोरती है। उनका हर कदम और हर बयान मीडिया की सुर्खियां बन जाता है।
तेज प्रताप की यह सक्रियता राजनीतिक परिवार के भीतर की जटिलताओं को दर्शाती है। कोर्ट में उनकी उपस्थिति ने साबित किया कि वह पारिवारिक मामलों से अलग नहीं हुए हैं। उनकी भूमिका और प्रभाव अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
कानूनी चुनौतियों का सामना
दिल्लीकी अदालत ने लैंड फॉर जॉब मामले को व्यापक आपराधिक साजिश माना है। लालू यादव समेत सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। यह मामला राजद परिवार के लिए बड़ी कानूनी चुनौती पेश करता है।
कोर्ट की कार्रवाई के दौरान पारिवारिक तनाव का सामने आना एक अलग पहलू था। यह दिन लालू परिवार के लिए सिर्फ कानूनी लड़ाई का नहीं रहा। यह भावनात्मक और राजनीतिक टकराव का भी गवाह बना। अब आगे की कानूनी कार्रवाई में यह परिवार एकजुट दिखेगा या अलग, यह देखना दिलचस्प होगा।

