Sports News: गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद टीम इंडिया की चयन नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दो अनुभवी बल्लेबाजों के लिए राष्ट्रीय टीम में वापसी का रास्ता अब लगभग बंद हो गया है। गंभीर के सख्त रवैये ने चयन प्रक्रिया में किसी समझौते की गुंजाइश नहीं छोड़ी है।
इन निर्णयों से साफ जाहिर है कि नई टीम प्रबंधन दीर्घकालिक योजना और भूमिका की स्पष्टता को प्राथमिकता दे रहा है। खिलाड़ियों का अतीत का रिकॉर्ड अब चयन का एकमात्र आधार नहीं रह गया है। यह नीति टीम के भविष्य के लिए एक नई दिशा तय करती है।
करुण नायर और सरफराज खान पर वापसी दरवाजा बंद
जिन दो खिलाड़ियों को टीम से बाहर माना जा रहा है, उनमें करुण नायर और सरफराज खान शामिल हैं। दोनों ने हाल के घरेलू सत्रों में शानदार प्रदर्शन किया है। फिर भी, उनकी वापसी की संभावना न के बराबर बताई जा रही है। गंभीर की टीम उन्हें भविष्य की योजनाओं में फिट नहीं पा रही है।
करुण नायर ने रणजी ट्रॉफी 2025-26 में लगातार अच्छे स्कोर बनाए हैं। उन्होंने केरल के खिलाफ 142 रन की शानदार पारी खेली थी। इससे पहले गोवा के खिलाफ उनका स्कोर नाबाद 174 रन था। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भी उन्होंने अर्धशतक जमाया था।
घरेलू रनों का भी नहीं हुआ फायदा
सरफराज खान ने भी सीमित ओवरों के क्रिकेट में धमाल मचा रखा है। विजय हजारे ट्रॉफी में उन्होंने गोवा के खिलाफ मात्र 75 गेंदों में 157 रन बनाए। उन्होंने सबसे तेज लिस्ट ए अर्धशतक का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा।
इन शानदार आंकड़ों के बावजूद, चयनकर्ताओं की नजर में वे टीम की वर्तमान जरूरतों पर खरे नहीं उतरते। माना जा रहा है कि फिटनेस और भूमिका की स्पष्टता को लेकर शंकाएं बनी हुई हैं। टीम प्रबंधन एक विशिष्ट खिलाड़ी प्रोफाइल की तलाश में है।
गंभीर की स्पष्ट दृष्टि और टीम संस्कृति
गौतम गंभीर ने शुरू से ही एक मजबूत टीम संस्कृति पर जोर दिया है। उनकी नीति में भावनात्मक चयन के लिए कोई जगह नहीं है। हर खिलाड़ी को टीम की सामरिक रूपरेखा के भीतर काम करना होगा। केवल रन बनाना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।
चयन समिति अब स्वभाव, अनुकूलन क्षमता और टीम संतुलन को अधिक महत्व दे रही है। यह दृष्टिकोण पुराने तरीकों से एक स्पष्ट विराम का संकेत देता है। इसका उद्देश्य भारतीय क्रिकेट को एक नई दिशा प्रदान करना है।
इन निर्णयों ने क्रिकेट प्रेमियों और विश्लेषकों के बीच चर्चा को जन्म दिया है। कई लोग इसे एक साहसिक कदम मानते हैं। वहीं, कुछ का मानना है कि प्रतिभा को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। आने वाले समय में इस नीति के परिणाम सामने आएंगे।
टीम इंडिया का भविष्य अब एक सुस्पष्ट रणनीति के इर्द-गिर्द बुना जा रहा है। गंभीर की टीम उन खिलाड़ियों पर दांव लगा रही है जो लंबे समय तक स्थिरता बनाए रख सकें। यह बदलाव भारतीय क्रिकेट के एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।

