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P-305 की ओर रवाना हुई टीमें, 100 किमी/घंटे की रफ्तार वाली हवाओं और ऊंची लहरों के बीच 188 जानें बचाईं

’17 मई को जैसे ही नेवी ने हमें समंदर में बार्ज P-305 पर फंसे लोगों के रेस्क्यू का ऑर्डर दिया, हम एक घंटे के भीतर रवाना हो गए। ताऊ ते तूफान की वजह से हवाएं 100 किमी/घंटे की रफ्तार से चल रही थीं और लहरें 10 मीटर तक ऊंची उठ रही थीं। हमें इन मुश्किल हालात के बीच लोगों को बचाना था।’ भास्कर से बातचीत में जब INS कोच्चि के कैप्टन सचिन सिक्वेरी ने ये बातें कही, तो हमें पता चला कि नेवी का ये ऑपरेशन कितना मुश्किल था।

चुनौतियों से हौसले की इस लड़ाई की पूरी कहानी कैप्टन सचिन की जुबानी..

तूफान के दौरान समुद्र में ऑपरेट करना चुनौतीपूर्ण होता है। ताऊ ते जब आया तो हवा की रफ्तार कम से कम 100 किमी प्रति घंटे थी। चक्रवात की वजह से समुद्र में लहरें 10 मीटर की ऊंचाई तक उठ रही थीं। इन कंडीशन में जहाज चलाना और उसे ऑपरेट करना मर्चेंट शिप के साथ-साथ वॉरशिप के लिए भी काफी चैलेंजिंग होता है।

इस कंडीशन में कुछ दिखाई भी नहीं देता। कभी-कभी बारिश इतनी ज्यादा होती है कि आपके हाथ तक नहीं दिखाई देते हैं। हम इन हालात में भी जहाज को ऑपरेट करते हैं। एक-दूसरे के पास जाते हैं। इसमें बहुत सी कठिनाई होती है, नेवी हमें ऐसी ही कठिनाइयों का सामना करने के लिए ट्रेंड करती है। हमारे ऑफिसर और नौसैनिक इन हालात के लिए पूरी तरह फिट हैं।

जब हमें नेवी ने बार्ज P-305 को रेस्क्यू करने का आदेश दिया तो हमने एक घंटे के भीतर INS कोच्चि को रवाना कर दिया। जब हालात बेहद मुश्किल थे, तब हम खुद को सेफ रखते हुए समुद्र के उस एरिया में रेस्क्यू के लिए पहुंचे, जहां जहाज फंसा था। 17 मई को ही रेस्क्यू शुरू कर दिया। 17 मई की शाम, रात और 18 की दोपहर तक लगातार हम रेस्क्यू करते रहे।

तूफान की वजह से बारिश बहुत हो रही थी। इसे नेवी की टर्म में डार्क नाइट कहा जाता है। चक्रवाती तूफान की वजह से रात को कुछ भी दिखाई नहीं देता है। हमने इन हालात में 188 लोगों को रेस्क्यू किया। दूसरे जहाजों से रेस्क्यू करके भी लोगों को किनारे तक पहुंचाया गया।

रात की वजह से कुछ लोग पानी में गिरे भी, लेकिन पानी में गिरने की वजह से किसी को गहरी चोट नहीं लगी। जहाज पर हमारे डॉक्टर, मेडिकल सहायक और स्टाफ ने सभी लोगों का इलाज किया।

इस तरह अंजाम दिए जाते हैं नेवी ऑपरेशन
कैप्टन सचिन ने बताया कि जहां हम जहाज को डूबता हुआ देखते हैं, हम पहले उसके आस-पास के एरिया में सर्च करते हैं। सर्च ऑपरेशन में हम हवा की गति और वहां के वातावरण को ध्यान में रखकर प्लान करते हैं। हवा की गति, समुद्र की गहराई, ज्वार की स्थिति का ध्यान रखा जाता है। हर दिन के साथ रेस्क्यू का एरिया बढ़ता है। यहां हम ज्यादा से ज्यादा यूनिट सर्च ऑपरेशन के लिए लगाते हैं ताकि पूरा एरिया कवर किया जा सके।

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