Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में क्षय रोग यानी टीबी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वर्ष 2022 में राज्य में पांच लाख टीबी मरीज थे। यह संख्या 2023 में बढ़कर 6.24 लाख हो गई। 2025 में यह आंकड़ा 6.90 लाख तक पहुंच गया है। इस वृद्धि ने स्वास्थ्य विभाग को चिंता में डाल दिया है।
राज्य सरकार ने अब कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। सभी शहरी क्षेत्रों में होटल और हास्पिटैलिटी सेक्टर के कर्मचारियों की नियमित टीबी जांच अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा सभी गंभीर टीबी मरीजों का चेस्ट एक्स-रे कराना भी जरूरी होगा।
राज्य बनी राष्ट्रीय लक्ष्य की सबसे बड़ी बाधा
उत्तर प्रदेश में टीबी मरीजों की बढ़ती संख्या राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गई है। देश को टीबी मुक्त करने के लक्ष्य में यह राज्य सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। पूरे देश में सबसे अधिक टीबी मरीज यहीं पाए जाते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए हाल में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई।
अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अहम फैसले लिए गए। सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों की अनिवार्य टीबी जांच पर सहमति बनी। जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के रसोई कर्मचारियों की भी जांच जरूरी होगी।
फरवरी में शुरू होगा 100 दिवसीय सघन अभियान
अमित कुमार घोष के मुताबिक इन कदमों से संक्रमण के जोखिम को प्रारंभिक स्तर पर नियंत्रित किया जा सकेगा। प्रदेश सरकार एक बार फिर टीबी उन्मूलन के लिए 100 दिवसीय विशेष अभियान शुरू करेगी। यह अभियान फरवरी महीने में शुरू होगा।
इस अभियान में जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों के सहयोग से मरीजों की खोज की जाएगी। खोजे गए मरीजों का तुरंत इलाज शुरू करने की रणनीति बनाई गई है। इसका लक्ष्य अधिक से अधिक मरीजों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
58 जिलों में एआई तकनीक से एक्स-रे जांच
टीबी के सभी गंभीर मरीजों के चेस्ट एक्स-रे के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए राज्य के 58 जिलों में 180 एक्स-रे मशीनों को अपग्रेड किया गया है। इन मशीनों में मुफ्त एआई आधारित जांच तकनीक जोड़ी गई है। यह तकनीक जल्द और सटीक निदान में मदद करेगी।
टीबी मरीजों के इलाज के लिए उन्हें गोद लेने की योजना भी चल रही है। नि:क्षय मित्र पहल के तहत नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन ने बुलंदशहर में 7,593 टीबी मरीजों को गोद लिया है। यह संख्या प्रदेश में सबसे अधिक है।
उच्च जोखिम वाले समूहों पर विशेष ध्यान
राज्य सरकार ने टीबी की उच्च जोखिम श्रेणी वाले लोगों की पहचान की है। इनमें मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग शामिल हैं। वृद्धाश्रम के निवासी भी इस श्रेणी में आते हैं। निर्माणाधीन भवनों और ईंट भट्टों पर काम करने वाले मजदूर भी शामिल हैं।
जेलों में बंद कैदियों की भी नियमित जांच की जाएगी। राज्य एवं जिला टीबी फोरम की हर महीने बैठक होगी। जिला टीबी फोरम की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इससे कार्यों की निगरानी आसान होगी।
सभी विभागों के समन्वय पर जोर
अमित कुमार घोष ने स्पष्ट किया कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को समन्वित रूप से काम करना होगा। समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए टीबी चैंपियंस की भूमिका सशक्त की जाएगी।
टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के लिए इंटरनेट और अन्य मीडिया माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाएगा। संभावित मरीजों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाएगी। चिह्नित मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार बिना देरी के उपलब्ध कराया जाएगा।
