ज्वालामुखी के बहुचर्चित टैक्सी घोटाले पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा जांच करवाने व फीडबैक लेने के बयान के बाद इस मामले में दोषियों के चेहरे से नकाब हटने की आस बंधी है। उम्मीद जताई जा रही है कि लगभग एक महीने से रद्दी की टोकरी में धूल फांक रही ज्वालामुखी के एक आर.टी.आई. एक्टिविस्ट की शिकायत पर अब कार्रवाई जरूर होगी। शिकायतकर्ता ने आर.टी.आई. के माध्यम से टैक्सी घोटाले का पर्दाफाश किया था। ज्वालामुखी एस.डी.एम. कार्यालय ने कोविड के दौरान गत वर्ष जिन टैक्सियों को किराए पर लिया था उनके नाम व पते बताने से साफ मना किया था, जिसके बाद आशंका हुई कि टैक्सियों के लेनदेन में कहीं न कहीं गोलमाल जरूर हुआ है। 

हालांकि शिकायतकर्ता द्वारा डी.एस.पी. ज्वालामुखी को शिकायत देने के बाद पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए हमीरपुर जिला के नादौन की नीलकमल टैक्सी यूनियन के दस्तावेज खंगाले थे, लेकिन रहस्यमयी तरीके से मामले को यूं विराम दिया गया जैसे कुछ हुआ ही नहीं था। 1,63,027 रुपए के इस गोलमाल में टैक्सी यूनियन ने साफ  किया था कि ज्वालामुखी प्रशासन ने जिस कुटेशन पर बिलों की अदायगी की है वो फर्जी है। अतः यूनियन का इससे कोई लेना देना नहीं है। मजेदार बात है कि यूनियन ने जांच में पूरा सहयोग करते हुए ज्वालामुखी पुलिस की जांच आसान करने मे अहम भूमिका निभाई, लेकिन पुलिस ने मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। 

बुधवार को धर्मशाला में पत्रकारों द्वारा जांच आगे नहीं बढने तथा मामला विधानसभा के पटल पर भी उछलने की याद दिलाते हुए प्रश्न हुआ तो मुख्यमंत्री ने फीडबैक लेने की बात कही, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि मामले को कुंद करने में जुटी पुलिस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हैरानीजनक है कि नीलकमल टैक्सी यूनियन ने नादौन थाना तथा ज्वालामुखी थाना में इस बात को लेकर शिकायत दी है कि उनके लेटरहेड का दुरुपयोग करते हुए टैक्सी यूनियन के पूर्व प्रधान ने गड़बड़झाला में ज्वालामुखी प्रशासन का साथ दिया है। बावजूद इसके एस.डी.एम. कार्यालय के अधीक्षक समेत अन्य लोगों पर जिनके हस्ताक्षरों के बाद रकम की अदायगी टैक्सी यूनियन के बैंक खाते में न करके एक आरोपित के व्यक्तिगत खाते में कर दी पर पुलिस मामला दर्ज करने से परहेज कर रही है। उधर हिमगिरि हिन्दू महासभा के प्रदेश सचिव किशन शर्मा ने कहा है कि यदि मुख्यमंत्री बयान से आगे बढ़कर अधिकारियों से इस मामले में संदिग्ध लोगों पर मामला दर्ज करने के निर्देश देते तो और भी बेहतर होता। लेकिन अब देखना बाकी है अधिकारी मुख्यमंत्री के बयान को बयान ही समझते हैं या सरकार के निर्देश।

मामले में खुद टैक्सी यूनियन व आर.टी.आई. से लिए गए दस्तावेज आरोपितों पर मामला दर्ज करने को काफी हैं। बावजूद इसके मामला तस से मस नहीं होने के कारण ज्वालामुखी पुलिस पर तरह तरह के आरोप लग रहे  हैं। लोगों का तर्क है कि इतने बड़े गोलमाल में कार्रवाई न होना पुलिस की प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। मामले को लेकर एक दो दिन में ज्वालामुखी की एक संस्था उच्च न्यायालय के माध्यम से एफ.आई.आर. दर्ज करवाने हेतु कमर कसे हुए है।

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