Himachal News: हिमाचल प्रदेश के टैक्सी मालिकों के लिए दिल्ली से अच्छी खबर आ सकती है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सामने एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने टैक्सी परमिट की वैधता को मौजूदा 12 साल से बढ़ाने की वकालत की है। गुरुवार को दिल्ली में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह मुद्दा जोर-शोर से गूंजा। अगर नितिन गडकरी इस प्रस्ताव को हरी झंडी देते हैं, तो यह फैसला हजारों वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा।
परमिट की सीमा 15 साल करने की मांग
दिल्ली में 43वीं परिवहन विकास परिषद की राष्ट्रीय बैठक आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने की। बैठक में हिमाचल की ओर से मुकेश अग्निहोत्री ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि अभी टैक्सी परमिट केवल 12 साल के लिए मान्य होता है। इससे टैक्सी मालिकों को काफी नुकसान और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने नितिन गडकरी से आग्रह किया कि इस समय सीमा को बढ़ाकर कम से कम 15 साल किया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जब तक वाहन सड़क पर चलने योग्य है, तब तक परमिट मान्य रहना चाहिए।
पहाड़ की भूगोल को देखते हुए मांगे ये बदलाव
मुकेश अग्निहोत्री ने नितिन गडकरी को हिमाचल की भौगोलिक चुनौतियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य में समतल भूमि की काफी कमी है। इसलिए ड्राइविंग टेस्ट स्कूल और ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन को एक ही जगह बनाना मुश्किल है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इन दोनों को अलग-अलग जगहों पर स्थापित करने की छूट दी जाए। क्लस्टर योजना के तहत यह व्यवस्था करने से राज्य में परिवहन सुविधाओं का विस्तार आसानी से हो सकेगा।
टिप्पर और मालवाहक वाहनों पर भी चर्चा
बैठक में मालवाहक वाहनों का मुद्दा भी छाया रहा। हिमाचल सरकार ने सुझाव दिया कि टिप्पर जैसे भारी वाहनों की क्षमता उनकी वास्तविक ढुलाई के आधार पर तय होनी चाहिए। नितिन गडकरी ने हिमाचल प्रदेश की सभी मांगों को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार इन मुद्दों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। नितिन गडकरी ने कहा कि राज्यों में सुरक्षित और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था बनाने के लिए केंद्र हर संभव मदद करेगा। बुनियादी ढांचे के विकास में भी पूरा सहयोग दिया जाएगा।

