ताऊ ते’ से किसानों को फायदा, कपास, बाजरा और मूंग की खेती का रकबा बढ़ेगा, लेकिन बंदरगाहों पर बुरा असर

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अरब सागर से उठा ‘ताऊ ते’ चक्रवात महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक के बाद गुजरात और राजस्थान में एंट्री ले चुका है। इससे इन राज्यों में बारिश पर निर्भर रहने वाले किसानों के लिए यह वरदान साबित होगा। चक्रवात से इन राज्यों में कपास, बाजरे और मूंग की खेती समय से होगी, जिससे बुआई का रकबा भी बढ़ेगा, लेकिन बंदरगाहों से सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है। नतीजा यह होगा कि ग्राहकों को खाने के तेल सहित वे सभी आइटम महंगे मिलेंगे जो बाहरी देशों से खरीदा जाता है।

समुद्र में हलचल से सप्लाई होगी प्रभावित
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केड़िया के मुताबिक इस समय खेती में केवल कपास की बुआई का समय है। इसलिए चक्रवात से किसानों को ज्यादा नुकसान नहीं है, लेकिन स्टोरेज की किल्लत से फसल नुकसान होने का खतरा है। वहीं, समुद्र में भारी हलचल से बंदरगाहों पर ट्रांसपोर्टेशन थमा है। चूंकि भारत में पोर्ट से ज्यादातर सप्लाई गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों से होती है और यहीं तूफान का प्रभाव ज्यादा है।

बाहरी देशों से खरीदे जाने वाले प्रोडक्ट्स होंगे महंगे
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इंपोर्ट किए जाने वाले प्रोडक्ट्स के लिहाज से यह तूफान पॉजिटिव और एक्सपोर्ट के लिहाज से निगेटिव साबित होगा। इस लिहाज से खाने के तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ेगा, जो पहले से ही अब तक के सबसे ऊंचे भाव पर बिक रहा है। क्योंकि भारत पाम ऑयल का इंपोर्ट बाहरी देशों से करता है। वहीं, ग्वार गम, जीरा सहित अन्य आइटम के दाम घटेंगे, क्योंकि भारत इनका प्रमुख उत्पादक देश है। तूफान के चलते इनका एक्सपोर्ट धीमा पड़ जाएगा।

खेती का रकबा बढ़ने की उम्मीद
मौसम की जानकारी रखने वाले एक्सपर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान और गुजरात में खेती के लिहाज से तूफान अच्छा साबित होगा। दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में खेती वर्षा पर निर्भर होती है। इनमें राजस्थान के कुछ जिले जैसे चूरू, हनुमानगढ़, बीकानेर सहित जैसलमेर में बारन्नी रकबा ज्यादा है यानी यहां खेती केवल बारिश पर निर्भर होती है।

बारिश से होगी समय पर खेती
स्थानीय किसान श्रीपाल के मुताबिक अच्छी बारिश से बाजरा और मूंग की बुआई हो जाएगी। इसके अलावा नहरी एरिया में बारिश से मूंग और कपास की खेती समय पर होगी। साथ ही इनकी खेती भी बढ़ेगी। हालांकि ग्वार की खेती में थोड़ी कमी देखने को मिल सकती है। गुजरात के कुछ किसानों से बातचीत में पता चला कि समय से पहले बारिश से कपास का रकबा बढ़ जाएगा।

तूफान की स्थिति पर पीएम ने ली जानकारी
फिलहाल, तूफान महाराष्ट्र के पालघर और वापी के समानांतर करीब 150 किमी दूरी से गुजर रहा है। तूफान की चक्रीय हवाओं की गति 17 मई को करीब 165 किमी प्रति घंटा रही। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात के मुख्यमंत्रियों और दमन-दीव के LG से बात कर हालात की जानकारी ली।

तट से टकराने के बाद कमजोर होगा तूफान
सोमवार को तूफान के गुजरने पर सबसे ज्यादा बारिश रत्नागिरी (400 मिमी) और गोवा में (300 मिमी) दर्ज हुई। तटीय इलाकों में 60-70 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं भी चलीं। हालांकि, तट से टकराने के बाद तूफान के कमजोर होने की संभावना है। गुजरात में इसके असर से आज यानी मंगलवार को भी दिनभर भारी बारिश हो सकती है। राजस्थान पहुंचते पहुंचते तूफान कमजोर होते-होते डीप डिप्रेशन में बदलेगा। 18 मई की दोपहर तक कम दबाव के क्षेत्र में बदलते हुए हिमालय की ओर बढ़ जाएगा

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