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दूध मुहे बच्चे से दूर रह कर अपना फर्ज निभा रही है कोरोना वॉरियर तनवी शर्मा


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मेरा भी मन करता है कि घर जाऊं और बच्चे को गले लगा लूं लेकिन कोरोना से पैदा हुए हालात देखकर अपना फर्ज याद आ आता है तो अपने मन को शांत कर लेती हूं और काम में जुट जाती हूं। यह कहना है मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स तनवी शर्मा शर्मा का। वह अपने 13 महीने के बच्चे को घर छोड़कर घर से 300 किलोमीटर दूर सेवाएं दे रही है। तनवी शर्मा का पिछले वर्ष प्रसव हुआ और जब बच्चा 5 महीने का हुआ तो उसे घर पर छोड़कर ड्यूटी पर तैनात हो गई। हालांकि आज उनका बच्चा एक साल का हो चुका है और वह अपने कार्य को बखूबी अंजाम दे रही हैं।

3 साल से मेडिकल कॉलेज चम्बा में दे रहीं सेवाएं

तनवी शर्मा ने बताया कि कोरोना महामारी में मरीजों की स्थिति को देखकर तरह-तरह के ख्याल आने लगते हैं।

उनकी सास बच्चे की अच्छे से देखभाल करती हैं और उन्हें खुशी है कि उन्हें सास के रूप में मां मिली है। उन्होंने बताया कि वह मेरे बच्चे की दादी कम और मां ज्यादा हैं क्योंकि 13 महीने के बच्चे को संभालना एक मां ही कर सकती है। तनवी 3 साल से मेडिकल कॉलेज चम्बा में सेवारत है। कोरोना काल में उनका कार्य काफी सराहनीय रहा। वह दिन-रात मरीजों की सेवा करने में जुटी हुई हैं। तनवी ने बताया कि अस्पताल में आए हर मरीज को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए, उन्हें एक बार स्वास्थ्य विभाग में काम कर रहे स्टाफ के बारे मे सोचना चाहिए। अपने परिवार से दूर रहकर उनकी सेवा कर रहे हैं। उन्हें भी अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए प्रयास करने चाहिए और हर बीमारी से लडऩे के लिए सही सोच सबसे जरूरी है, जोकि दवाई से ज्यादा गुणकारी मानी जाती है।

संक्रमण के डर से 13 माह के बच्चे को भेजना पड़ा 300 किलोमीटर दूर

तनवी ने बताया कि जब उनका बेटा एक साल का हुआ तो वह उसे अपने साथ चम्बा ले आई, लेकिन इस सप्ताह से कोरोना वार्ड में ड्यूटी लगने के कारण उन्होंने बच्चे को 300 किलोमीटर दूर भेज दिया है। उन्होंने बताया कि मन नहीं था भेजने का, लेकिन कोरोना मरीजों की देखरेख करते अगर किसी के भी संपर्क में आ जाती तो बच्चे को भी संक्रमण का खतरा हो सकता था। इसके लिए उन्होंने बच्चे को मंडी भेज दिया है।

हर दिन वीडियो कॉल के माध्यम से करती हैं बच्चे से बात

तनवी ने बताया कि हर रोज बच्चे से फोन पर वीडियो कॉल के माध्यम से बात करती हैं। उन्हें बुरा लगता है कि बच्चा खुद से इतना दूर है, लेकिन मरीजों को देख उसका हौसला बढ़ता है। उसका मकसद मरीजों को ठीक करना ही है। उन्होंने बताया कि मरीज के ठीक होने पर बहुत खुशी होती है कि हमारी मेहनत से एक मरीज स्वस्थ हुआ है। किसी के परिवार में दोबारा खुशी आई है और वह अपने फर्ज से कभी पीछे नहीं हटी हैं।

पति-ससुर दोनों आवश्यक सेवाओं में

तनवी ने बताया कि मेरे पति कुल्लू में बैंक में कार्यरत हैं और ससुर हिमाचल पथ परिवहन निगम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोरोना काल में दोनों अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सास के घुटनों में दर्द है, फिर भी वह बच्चे को बखूबी से संभालती हैं। इसके लिए वह खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें सास के रूप में मां मिली है। पति का भी काफी सहयोग मिलता रहा है। पति के सहयोग के कारण ही आज वह अपना कार्य अच्छे से कर रही हैं।

नहीं आईं कभी कोरोना की चपेट में

तनवी ने बताया कि हर दिन मेडिकल कॉलेज में सैंकड़ों मरीज आते हैं लेकिन आज दिन तक कभी भी कोरोना वायरस उन्हें छू नहीं पाया है। इसके लिए वह भगवान का शुक्रिया करती हैं। उन्होंने बताया कि हर समय मास्क पहनना, हाथों को बार-बार धोना और सरकार द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने के कारण ही यह सब संभव हो पाया है।


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