World News: अमेरिकी सेना ने सीरिया में एक बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में अल-कायदा से जुड़े एक शीर्ष कमांडर को मार गिराया गया है। यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार बिलाल हसन अल-जासिम नामक यह आतंकी पिछले महीने हुए घातक हमले का मास्टरमाइंड था। उस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक दुभाषिए की मौत हो गई थी।
यह हमला अमेरिका के व्यापक सैन्य अभियान ‘हॉकी स्ट्राइक’ का हिस्सा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सैनिकों पर हमले के बाद इस अभियान को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य सीरिया में सक्रिय आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को नष्ट करना है। अभियान में अब तक कई सफल हमले किए जा चुके हैं।
तीन अमेरिकियों की हत्या से था सीधा संबंध
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि मारा गया कमांडर सीधे तौर पर 13 दिसंबर के हमले से जुड़ा था। उस हमले में सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-टोवार और सार्जेंट विलियम नथानियल हॉवर्ड शहीद हुए थे। अमेरिकी दुभाषिया अयाद मंसूर सकात की भी उसी हमले में मौत हो गई थी। यह घटना सीरिया के उत्तर-पूर्वी इलाके में घटी थी।
अमेरिकी कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि इस आतंकी का सफाया अमेरिकी संकल्प को दर्शाता है। अमेरिका अपने बलों पर हमला करने वालों का पीछा करने में पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे लोगों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है।
आईएसआईएस के पुनर्गठन को रोकना है लक्ष्य
यह सैन्य अभियान मुख्य रूप से आईएसआईएस के पुनर्गठन को रोकने के लिए शुरू किया गया है। बशर अल-असद की सत्ता कमजोर होने के बाद यह समूह फिर से सक्रिय होने की कोशिश कर रहा था। अमेरिका और उसके साझेदार देश इस खतरे को गंभीरता से ले रहे हैं। जॉर्डन और सीरिया के कुछ गठबंधनों ने भी इस अभियान में सहयोग दिया है।
सेंटकॉम के आंकड़ों के अनुसार इस अभियान के तहत 100 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया है। इनमें आतंकियों के बुनियादी ढांचे और हथियारों के ठिकाने शामिल हैं। इन हमलों से आतंकी संगठनों को भारी नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी सेना ने इन कार्रवाइयों को सटीक और सफल बताया है।
उत्तर-पश्चिमी सीरिया में शुक्रवार को हुई यह कार्रवाई तीसरे दौर का हिस्सा थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने लंबे समय तक इस कमांडर पर नजर रखी थी। सही समय आने पर उसे निशाना बनाया गया। इस तरह की कार्रवाइयों से आतंकी नेतृत्व को बड़ा झटका लगता है।
सीरिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति लंबे समय से जारी है। यह उपस्थिति आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से है। अमेरिकी प्रशासन ने बार-बार कहा है कि वह अपने सैनिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। कोई भी हमला बिना जवाब दिए नहीं छोड़ा जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर सीरिया की जटिल सुरक्षा स्थिति को उजागर किया है। देश में कई विदेशी ताकतें सक्रिय हैं। आतंकी संगठन अभी भी कुछ इलाकों में मौजूद हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट के स्थायी समाधान की तलाश में है। हाल की सैन्य कार्रवाइयाँ इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
