मिडिल ईस्ट महायुद्ध के बीच स्विट्जरलैंड का बड़ा फैसला, अमेरिका को एयर स्पेस देने से किया इनकार!

International News: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच स्विट्जरलैंड ने एक बड़ा साहसी कदम उठाया है। अपनी ऐतिहासिक ‘तटस्थता’ (Neutrality) की परंपरा का हवाला देते हुए स्विट्जरलैंड ने अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। यह फैसला तब आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अन्य देशों से होर्मुज स्ट्रेट में युद्धपोत भेजने की अपील की है। स्विट्जरलैंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा और न ही अपनी जमीन या आकाश का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए करने देगा।

तटस्थता कानून के तहत अमेरिकी अनुरोध खारिज

स्विट्जरलैंड की संघीय परिषद ने अमेरिकी सैन्य विमानों द्वारा उड़ान भरने के कई अनुरोधों पर गहन विचार किया। ईरान युद्ध से सीधे जुड़े दो टोही विमानों के अनुरोधों को सरकार ने तुरंत अस्वीकार कर दिया। फेडरल अथॉरिटी का कहना है कि स्विट्जरलैंड का ‘न्यूट्रैलिटी लॉ’ उसे किसी भी सशस्त्र संघर्ष में शामिल होने से रोकता है। हालांकि, परिषद ने मानवीय सहायता और रखरखाव से जुड़ी तीन अन्य उड़ानों को मानवीय आधार पर अनुमति दी है। देश ने साफ कर दिया है कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही इस जंग में वह पूरी तरह निष्पक्ष रहेगा।

तीसरे हफ्ते में पहुंचा युद्ध, शांति की उम्मीद खत्म

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी यह जंग अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है। दोनों ही पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और शांति वार्ता की संभावनाओं को पूरी तरह नकार दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने खर्ग द्वीप पर बमबारी के बाद ईरान को ‘तबाह’ करने की चेतावनी दी है। वहीं तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की कसम खाते हुए अमेरिका को क्षेत्र से अपना बोरिया-बिस्तर समेटने को कहा है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस खूनी संघर्ष में अब तक 2,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिससे पूरी दुनिया में शोक की लहर है।

वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ा भारी असर

इस युद्ध ने न केवल मानवीय संकट पैदा किया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी हिलाकर रख दिया है। ईरान पर हुए हमलों के कारण तेल की आपूर्ति में इतिहास की सबसे बड़ी बाधा उत्पन्न हुई है। खर्ग द्वीप जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों पर बमबारी से कच्चा तेल उत्पादन ठप हो गया है, जिसके चलते दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। स्विट्जरलैंड जैसे देशों का यह फैसला संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस महायुद्ध की आंच से खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है।

Hot this week

Related Articles

Popular Categories