National News: भारत की आध्यात्मिक चेतना को वैश्विक पटल पर स्थापित करने वाले स्वामी विवेकानंद की जयंती सोमवार को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई गई। यह दिन देश की युवा पीढ़ी को आत्मविश्वास, सेवा और राष्ट्र निर्माण के पथ पर चलने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित कई नेताओं ने स्वामी जी को श्रद्धांजलि दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद को युवाओं के लिए प्रेरणा का मजबूत स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी का व्यक्तित्व और क्रांतिकारी विचार विकसित भारत के संकल्प को नई शक्ति देते हैं। पीएम ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उनके अनुसार युवा शक्ति देश के कायाकल्प की धुरी है।
राष्ट्रपति और गृह मंत्री ने किया विचारों का स्मरण
राष्ट्रपतिद्रौपदी मुर्मू ने स्वामी जी के संदेशों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सेवा, आत्मबल और मानवता को जीवन का वास्तविक आधार बताया। उन्होंने भारत के प्राचीन दर्शन और ज्ञान को पूरी दुनिया तक पहुंचाने में अद्वितीय भूमिका निभाई। उनके विचार आज भी करोड़ों युवाओं के लिए प्रकाश स्तंभ बने हुए हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने स्वामी विवेकानंद को युवाओं का सच्चा मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने रामकृष्ण मिशन के माध्यम से समाज सेवा का मार्ग दिखाया। उन्होंने युवाओं को भारतीय अध्यात्म और अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य किया। उनके विचार युवाओं के भीतर कर्तव्य और जिम्मेदारी की भावना जागृत करते हैं।
शिकागो के ऐतिहासिक भाषण से मिली थी पहचान
स्वामीविवेकानंद ने बारह सितंबर 1893 को शिकागो में ऐतिहासिक भाषण दिया था। इस भाषण ने विश्व को भारत की आध्यात्मिक शक्ति से परिचित कराया। नरेंद्रनाथ दत्त से स्वामी विवेकानंद बने इस युगपुरुष के विचार आज भी उतने ही जीवंत हैं। युवा मामलों और खेल मंत्रालय के अनुसार उनका विश्वास आधुनिक भारत की प्रगति के लिए प्रासंगिक है।
स्वामी विवेकानंद का जन्म बारह जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस को अपना गुरु बनाया और देश-विदेश में भारतीय दर्शन का प्रचार किया। उनकी शिकागो यात्रा और भाषण ने उन्हें अमर बना दिया।
युवाओं के लिए स्वामी जी के प्रमुख संदेश
स्वामीविवेकानंद ने युवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश दिए थे। उनका मानना था कि स्वयं पर विश्वास सफलता की पहली सीढ़ी है। उन्होंने युवाओं के जोश और मेहनत को देश की प्रगति का आधार बताया। सेवा और मानवता को उन्होंने सबसे बड़ा धर्म कहा।
उनका संदेश था कि जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए तब तक प्रयास नहीं रोकना चाहिए। उन्होंने युवाओं को निर्भय और साहसी बनने की प्रेरणा दी। उनके विचारों ने स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण दोनों को प्रभावित किया। आज भी देश के शैक्षणिक संस्थान उनके विचारों को पढ़ाते हैं।
देशभर में हुए विभिन्न कार्यक्रम
राष्ट्रीय युवादिवस के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्कूलों और कॉलेजों में भाषण, वाद-विवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। युवा मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन किया। कई संगठनों ने सेवा कार्यक्रम और शिविर लगाए।
रामकृष्ण मिशन और मठों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। सोशल मीडिया पर भी युवाओं ने स्वामी जी के विचार साझा किए। इस दिन का उद्देश्य युवाओं को उनके आदर्शों के प्रति प्रेरित करना है। देश के नेताओं ने युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण में लगाने का आह्वान किया।
वर्तमान संदर्भ में विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता
आज केदौर में स्वामी विवेकानंद के विचार और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने जिस आत्मविश्वास और कर्मठता की बात की वह आज के युवा के लिए जरूरी है। वैश्विक चुनौतियों के बीच उनका दर्शन मार्गदर्शन करता है। उन्होंने विज्ञान और आध्यात्म के समन्वय पर बल दिया था।
युवाओं को नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की उनकी सीख आज भी महत्वपूर्ण है। डिजिटल युग में उनका ज्ञान और दर्शन नई पीढ़ी को संतुलन सिखाता है। शिक्षा प्रणाली में उनके विचारों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। देश का युवा उनके आदर्शों को आत्मसात कर रहा है।
