New Delhi News: उच्चतम न्यायालय ने न्यायिक सुधारों की मांग वाली एक जनहित याचिका को ‘पब्लिसिटी स्टंट’ करार देते हुए खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने याचिकाकर्ता कमलेश त्रिपाठी को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुर्खियां बटोरने के लिए अदालत के समय का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि ऐसी याचिकाएं देशहित में नहीं बल्कि निजी प्रचार के लिए होती हैं।
‘कैमरे के सामने आने के लिए न करें याचिका’
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर आप वाकई व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं, तो याचिका की जरूरत नहीं है। आप बस एक पत्र लिखकर मुझे भेज सकते हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि लोग केवल कैमरामैन के सामने खड़े होने के लिए ऐसी याचिकाएं दायर न करें। कोर्ट ने इसे देशहित के बजाय टीवी पर आने का जरिया बताया।
अदालतों की संख्या और समय सीमा पर सवाल
याचिका में हर केस का फैसला एक साल के भीतर करने की मांग की गई थी। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या आपको अंदाजा है कि इसके लिए कितनी अदालतों की जरूरत होगी? सीजेआई ने कहा कि न्याय प्रक्रिया में जांच एजेंसियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हम हर दिन जांच अधिकारी से प्रगति रिपोर्ट नहीं मांग सकते। इतनी बड़ी संख्या में नई अदालतों की व्यवस्था करना फिलहाल व्यावहारिक नहीं है।
समय की बर्बादी पर जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी मांगों के लिए बार-बार याचिकाएं दायर नहीं होनी चाहिए। इससे न केवल याचिकाकर्ता का समय बर्बाद होता है, बल्कि कोर्ट का कीमती वक्त भी जाया होता है। पीठ ने साफ किया कि न्यायिक सुधार एक गंभीर विषय है। इसे बिना सोचे-समझे दायर की गई याचिकाओं के जरिए नहीं सुलझाया जा सकता। अंततः कोर्ट ने इस मामले पर आगे सुनवाई करने से पूरी तरह इनकार कर दिया।
