Cricket News: एशेज सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4-1 से मिली करारी हार के बाद इंग्लैंड की ‘फियरलेस क्रिकेट’ की रणनीति सवालों के घेरे में है। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने इसे ‘लापरवाह’ खेल करार दिया है। उन्होंने कहा कि ब्रेंडन मैकुलम और बेन स्टोक्स के नेतृत्व वाली टीम ने दिल से कोशिश नहीं की।
गावस्कर ने अपने एक कॉलम में तीखा प्रहार किया। उन्होंने लिखा कि नए कोच और कप्तान के आने पर नई सोच की उम्मीद होती है। शुरुआत में इंग्लैंड की आक्रामकता ने सबको चौंकाया था। लेकिन अब यह चमक फीकी पड़ गई लगती है।
कागजी शेर साबित हुई इंग्लैंड टीम
गावस्कर नेकहा कि इंग्लैंड का प्रदर्शन अक्सर उन मीडिया रिपोर्ट्स से मेल नहीं खाता जो बहुत उम्मीद जगाती हैं। इससे निराशा और भी बढ़ जाती है। एशेज में हार से यह साबित हो गया कि टीम असल में कागजी शेर है।
ऑस्ट्रेलिया में विदेशी टीम के लिए सीरीज जीतना हमेशा मुश्किल रहा है। इसलिए यह हार कुछ लोगों को हैरान नहीं करती। लेकिन तरीका चिंताजनक है। इंग्लैंड के खिलाड़ी परिस्थिति के अनुसार अपना खेल नहीं बदल पाए।
मैकुलम ने दी थी आईपीएल को शानदार शुरुआत
सुनील गावस्कर नेब्रेंडन मैकुलम की तारीफ भी की। उन्होंने लिखा कि मैकुलम एक शानदार क्रिकेटर रहे हैं। बीसीसीआई को उनका हमेशा आभारी रहना चाहिए। आईपीएल के पहले मैच में उनकी शानदार पारी ने लीग को बेहतरीन शुरुआत दी।
उस पारी ने संदेह करने वालों को गलत साबित किया था। इसने भारतीय क्रिकेट के इस नए प्रोडक्ट पर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। मैकुलम ने इंग्लैंड की टेस्ट टीम में भी नई ऊर्जा भरी थी। उन्होंने उबाऊ खेल को बदल दिया था।
सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट और लापरवाही का संबंध
गावस्कर नेएक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि आज का खिलाड़ी आर्थिक रूप से सुरक्षित है। सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट और विभिन्न टी20 लीग्स ने उनकी चिंताएं दूर कर दी हैं। पहले टीम से बाहर होने का मतलब वित्तीय संकट होता था।
अब ऐसा नहीं है। इससे खेल के प्रति जिम्मेदारी की भावना कमजोर हो सकती है। गावस्कर ने स्पष्ट किया कि यह बात खिलाड़ियों से ईर्ष्या के कारण नहीं कही जा रही। खिलाड़ियों की अच्छी कमाई खेल को फायदा पहुंचाती है।
जो रूट ही दिखा रहे जिम्मेदारी
एशेज सीरीज मेंकेवल जो रूट ही लगातार अच्छा प्रदर्शन करते दिखे। गावस्कर ने लिखा कि अपनी विकेट की कीमत समझना और देश के लिए खेलने का महत्व बस जो रूट ही दिखा रहे हैं। बाकी बल्लेबाज लगातार गलत शॉट्स खेलते रहे।
टीम प्रबंधन ने भी इन गलतियों पर सख्ती नहीं दिखाई। इससे खिलाड़ियों के मन में टीम से बाहर होने का डर खत्म हो गया। उन्हें पता था कि उनकी जगह कोई खतरा नहीं है। यही वजह है कि वे लापरवाही भरा खेल दिखाते रहे।
आक्रामकता का सरप्राइज खत्म
शुरुआत मेंइंग्लैंड की आक्रामकता ने विरोधी टीमों को हैरान कर दिया था। लेकिन हर नई चाल की तरह इसका असर भी समय के साथ कम हुआ। विरोधी टीमों ने इंग्लैंड की रणनीति को समझ लिया। उन्होंने जवाबी योजना बना ली।
जब पिचें सपाट नहीं होतीं तो इंग्लैंड की समस्याएं साफ दिखती हैं। विदेश में हार के बाद उनका मीडिया अक्सर पिचों को दोष देता है। लेकिन गावस्कर का मानना है कि असली समस्या अनुकूलन न कर पाना और जिम्मेदारी न लेना है।
खिलाड़ी नहीं दे पा रहे पूरी कोशिश
गावस्कर नेसीधा सवाल पूछा है। क्या एशेज हारने वाली इंग्लैंड टीम के खिलाड़ी दिल पर हाथ रखकर कह सकते हैं कि उन्होंने पूरी कोशिश की? क्या उन्होंने शारीरिक और मानसिक रूप से सब कुछ दिया? उनका मानना है कि जवाब ना में होगा।
जीत और हार खेल का हिस्सा हैं। लेकिन कोशिश पूरी दिल से होनी चाहिए। जब कोई खिलाड़ी लापरवाही दिखाता है तो वह अपनी टीम और देश को निराश करता है। यही चिंता का मुख्य बिंदु है।
