Chhattisgarh News: सुकमा के जंगलों में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। डीआरजी के जवानों ने एक सर्च ऑपरेशन के दौरान बारह नक्सलियों को मार गिराया है। यह मुठभेड़ किस्टाराम इलाके में हुई। इस दौरान सुरक्षाबलों ने अनेक हथियार भी बरामद किए हैं।
सुरक्षाबलों ने सुकमा के किस्टाराम इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया था। इसी दौरान उनकी माओवादियों से आमना सामना हो गया। दोनों पक्षों के बीच कई घंटों तक गोलीबारी हुई। इस मुठभेड़ में बारह नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
ऑपरेशन के दौरान जवानों ने एके-47 और इंसास राइफल जैसे हथियार भी जब्त किए। इन हथियारों का इस्तेमाल माओवादी संगठन द्वारा किया जाता था। सुरक्षा बलों का यह अभियान अभी भी जारी है।
खूंख्वार माओवादी मंगडू ढेर
इस मुठभेड़ में कोंटा एरिया कमेटी के सचिव मंगडू भी मारा गया है। उस पर प्रशासन ने आठ लाख रुपये का इनाम रखा था। मंगडू पिछले कई वर्षों से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था।
वह सुकमा जिले के गोगुड़ा गांव का निवासी था। मंगडू अपने साथियों के साथ जंगलों में छिपा हुआ था। उसकी मौजूदगी की सूचना मिलते ही डीआरजी की टीम ने ऑपरेशन शुरू किया।
मंगडू कई नक्सली हमलों को अंजाम देने के लिए जाना जाता था। वह हमेशा अपने पास एके-47 जैसे आधुनिक हथियार रखता था। उसकी गतिविधियों से सुरक्षा बलों को लंबे समय से चुनौती मिल रही थी।
एक घंटे तक चली गोलीबारी
सुरक्षा बलों की टीम तड़के सुबह ही जंगलों में पहुंच गई थी। इस दौरान माओवादियों ने जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। दोनों पक्षों के बीच लगभग एक घंटे तक मुठभेड़ चली।
इस गोलीबारी के बाद बारह नक्सली मारे गए। इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। अधिकारियों को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया। उन्होंने सटीक जानकारी मिलते ही डीआरजी टीम को रवाना किया था। यह जानकारी स्थानीय सूत्रों से प्राप्त हुई थी।
एएसपी आकाश की शहादत का बदला
इस मुठभेड़ में एसीएम हितेश नामक एक अन्य प्रमुख नक्सली भी मारा गया है। हितेश नौ जून को हुए आईईडी ब्लास्ट का मास्टरमाइंड था। उस धमाके में एएसपी आकाश राव गिरपुंजे शहीद हो गए थे।
एएसपी आकाश राव की शहादत के बाद से सुरक्षा बल उनके हत्यारों की तलाश में थे। आज के ऑपरेशन में जवानों ने उनकी मौत का बदला ले लिया है। यह सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी राहत की बात है।
हितेश कोंटा इलाके में सक्रिय माओवादी समूह का एक प्रमुख सदस्य था। उस पर कई हमलों को अंजाम देने का आरोप था। सुरक्षा बल उसे लंबे समय से ढूंढ रहे थे।
सुरक्षा बलों की रणनीति
सुरक्षा बल लगातार नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन चला रहे हैं। उनकी रणनीति स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी पर काम करने की है। इससे उन्हें माओवादियों के ठिकानों तक पहुंचने में मदद मिलती है।
डीआरजी यानी डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड की टीमें स्थानीय युवाओं से बनाई जाती हैं। इन्हें जंगल के इलाकों की अच्छी जानकारी होती है। यही कारण है कि उनके ऑपरेशन अक्सर सफल होते हैं।
इस ऑपरेशन की सफलता से सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है। यह नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण जीत है। इससे आने वाले दिनों में और ऑपरेशनों की राह आसान होगी।
सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ स्थल से महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए हैं। इन दस्तावेजों से माओवादी संगठन की गतिविधियों के बारे में नई जानकारी मिल सकती है। इससे भविष्य की कार्रवाइयों में मदद मिलेगी।
