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सुक्खू सरक ने डॉक्टरों का 20 फीसदी एनपीए किया बंद, डॉक्टर बनाएंगे संघर्ष समिति

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Shimla News: स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने हिमाचल में डाक्टर्स का एनपीए बंद कर दिया है। इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह पांच विभागों स्वास्थ्य, मेडिकल एजुकेशन, डेंटल, आयुष और वेटरनरी के लिए है और सिर्फ नई भर्तियों पर ही लागू होगा। प्रधान सचिव वित्त मनीष गर्ग की तरफ से जारी अधिसूचना के अनुसार नए भर्ती होने वाले एलोपैथी, डेंटल, आयुष व वेटरीनरी डॉक्टर्स का एनपीए बंद कर दिया गया है।

अधिसूचना 24 मई को जारी की गई है। इसके अनुसार हिमाचल प्रदेश में हैल्थ एंड फैमिली वेल्फेयर डिपार्टमेंट में भर्ती होने वाले एमबीबीएस डॉक्टर्स, डेंटल व आयुष के डाक्टर्स सहित एनिमल हस्बेंडरी डिपार्टमेंट में भर्ती होने वाले वेटरिनरी डाक्टर्स को एनपीए नहीं मिलेगा। अधिसूचना में इस बात का जिक्र नहीं है कि नए भर्ती होने वाले डाक्टर्स प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकते हैं या नहीं।

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उल्लेखनीय है कि एनपीए इसीलिए दिया जाता रहा है, ताकि डाक्टर्स निजी प्रैक्टिस न कर सकें। पिछले वेतन आयोग में हिमाचल में डाक्टरों को मूल वेतन का 25 फीसदी नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस मिलता था। 2016 से लागू नए वेतन आयोग में, क्योंकि डाक्टरों का बेसिक वेतन बढ़ गया था, इसलिए एनपीए को घटाकर 20 फीसदी कर दिया गया था। अब इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

वर्तमान सरकार ने 17 मई, 2023 को हुई कैबिनेट की बैठक में वित्त विभाग से आए प्रस्ताव पर यह फैसला लिया था। इस फैसले को लेने से पहले संबंधित पांचों विभागों से भी राय नहीं ली गई थी। स्वास्थ्य, मेडिकल एजुकेशन, दंत चिकित्सा विभाग, आयुष विभाग और पशुपालन विभाग को भी इस बारे में कैबिनेट के फैसले के बाद ही पता चला था। तर्क दिया गया था कि हिमाचल में अब ट्रेंड डाक्टरों की संख्या ज्यादा है, जबकि मौजूद वैकेंसी कम है। इसलिए एनपीए देने का औचित्य अब नहीं बनता।

डाक्टर नाराज, अब संयुक्त संघर्ष समिति बनाएंगे

हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर्ज एसोसिएशन ने इस फैसले को दुखद बताया है। एसोसिएशन के मुखिया और बाल रोग विशेषज्ञ के तौर पर डीडीयू अस्पताल शिमला में तैनात डाक्टर राजेश राणा का कहना है कि इस बारे में सभी संबंधित संगठनों से बात करके आगामी रणनीति बनाई जाएगी। इस मुद्दे पर डाक्टर्स की संयुक्त संघर्ष समिति बनाई जाएगी और इस फैसले का विरोध किया जाएगा। डा. राजेश राणा का कहना है कि एनपीए बंद करने के फैसले का व्यापक असर होगा। हिमाचल के डाक्टर्स इस फैसले से हतोत्साहित होंगे।

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