Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने आरक्षण के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए इसका दायरा बढ़ा दिया है। अब स्वतंत्रता सेनानियों के बेटों की तरह उनकी बेटियों के बच्चों (नाती-नातिन) को भी सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिलेगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
1994 के नियमों में हुआ बड़ा संशोधन
राज्य सरकार ने साल 1994 में बनी ‘हिमाचल प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी कल्याण निधि’ योजना में जरूरी बदलाव किए हैं। इस संशोधन के जरिए आरक्षण की परिभाषा को और व्यापक बनाया गया है। इससे पहले केवल बेटों की संतानों को ही स्वतंत्रता सेनानियों का आश्रित माना जाता था। लेकिन अब सरकार ने लैंगिक भेदभाव को खत्म करते हुए बेटियों के अधिकारों को भी सुरक्षित किया है। यह नया नियम प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
विवाहित और अविवाहित दोनों को मिलेगा हक
नए नियमों के अनुसार, अब स्वतंत्रता सेनानियों की पुत्रियों की संतानें भी आरक्षण की हकदार होंगी। इसमें विवाहित और अविवाहित दोनों तरह की संतानों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, वे अन्य लोग जो स्वतंत्रता सेनानी पर पूर्ण या आंशिक रूप से आश्रित रहे हों, वे भी इस श्रेणी में आएंगे। हालांकि, इसके लिए शर्त यह है कि उन्हें हिमाचल प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी कल्याण बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त होनी चाहिए।
भेदभाव खत्म करने की थी मांग
प्रदेश में लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि बेटियों की संतानों को भी समान अधिकार मिलने चाहिए। सरकार का कहना है कि यह फैसला समानता और न्याय के सिद्धांत को ध्यान में रखकर लिया गया है। इस कदम से स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव नहीं रहेगा। अब उनकी आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और सरकारी नौकरी के अवसरों में बराबर की हिस्सेदारी मिल सकेगी। इससे प्रदेश के हजारों परिवारों को सीधा फायदा पहुंचेगा।
