Pakistan News: आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक शीर्ष कमांडर पाकिस्तान में रहस्यमय हालात में मृत पाया गया है। अब्दुल गफ्फार नाम का यह आतंकी संगठन के कई अहम ऑपरेशन्स से जुड़ा था। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अभी तक उसकी मौत का कारण या आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस घटना ने आतंकी नेटवर्क के अंदर खलबली मचा दी है।
सुरक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गफ्फार लश्कर-ए-तैयबा की कमान संभालने वालों में शामिल था। उसकी मौत की खबर ने विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि पाकिस्तान में अक्सर आतंकियों की ऐसी मौत पर स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता।
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर viral हुई है जिसमें गफ्फार लश्कर के सरगना हाफिज सईद के बेटे के साथ नजर आ रहा है। इस तस्वीर ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। तस्वीर गफ्फार के संगठन में उच्च पद और गहरे कनेक्शन को दर्शाती है।
गफ्फार की मौत के बाद से आतंकी गुटों के अंदर बेचैनी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क पर पड़ सकता है। एक वरिष्ठ कमांडर के गायब होने से संगठन की योजनाओं में व्यवधान आ सकता है।
मौत का कारण अब भी रहस्य
अब्दुल गफ्फार की मौत कैसे हुई, यह सवाल बना हुआ है। पाकिस्तानी मीडिया में इसकी कोई स्पष्ट रिपोर्ट नहीं आई है। कुछ स्रोतों ने आंतरिक झगड़े का जिक्र किया है तो कुछ ने बीमारी की बात कही है। हालांकि कोई भी दावा अभी पुष्ट नहीं हुआ है।
इस घटना पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की भी नजर है। वे पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के बीच हो रही हलचल पर नजर रख रही हैं। गफ्फार के भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका जताई जाती रही है।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में आतंकी नेता अक्सर रहस्यमय परिस्थितियों में मारे जाते रहे हैं। इन मामलों में आमतौर पर सरकारी तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की जाती। यह पैटर्न एक बार फिर दोहराया गया लगता है।
लश्कर-ए-तैयबा पर पड़ सकता है असर
लश्कर-ए-तैयबा भारत के खिलाफ सक्रिय एक प्रमुख आतंकी संगठन है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे आतंकवादी समूहों की सूची में डाल रखा है। गफ्फार जैसे अनुभवी कमांडर का अचानक चले जाना संगठन के लिए बड़ा झटका है।
एक वरिष्ठ कमांडर की मौत से संगठन की रणनीति और फंडिंग प्रभावित हो सकती है। नए कमांडर को स्थापित होने में समय लगेगा। इस दौरान संगठन की गतिविधियां प्रभावित होने की संभावना है।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान में आतंकी गुटों के बीच अक्सर आपसी संघर्ष होते रहते हैं। यह मौत भी किसी ऐसे ही संघर्ष का नतीजा हो सकती है। हालांकि इसकी पुष्टि के लिए कोई सबूत नहीं है।
गफ्फार की मौत की जांच कर रही एजेंसियां अभी भी तथ्य जुटा रही हैं। उनके लिए यह पता लगाना जरूरी है कि यह मौत प्राकृतिक थी या किसी हिंसक घटना का नतीजा। इस सवाल का जवाब अभी मिलना बाकी है।
इस घटना ने आतंक नेटवर्क की कमजोरियों को उजागर किया है। एक बड़ा नाम अचानक गायब हो गया है। इससे संगठन के अन्य सदस्यों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल बन सकता है।

