हिमाचल प्रदेश आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता एस०एस०जोगटऻ ने प्रदेश की पूर्व ओर वर्तमान सरकारों पर प्रदेश के लगभग पचास हजार मजबुर लोगों को किसी न किसी बहाने आज कल करते हुए रिटेंशन पॉलिसी या नहीं की मकानों का समय पर नियामिती करण न होने के ऐसे मकड़ जाल में फसा रखा है,जिसके चलते इन मकान मालिकों को प्रताड़ना ओर बैंकों के कर्जो के तले दबे होने की परेशानियों के सिवा और कुछ हासिल नहीं हो पाया।सरकार ने खुद तो कुछ नहीं लेकिन कुछ ऐसी रचना रची गई की मामला न्यालय में पहुंच गया और सरकार को दिखाने के लिए बहाना ये रहा है कि ये मामला माननीय एन०जी० टी०ओर दूसरे न्याल्यों में लंबित है।आम आदमी पार्टी का आरोटो मुल्त: तो यह है कि यदि सरकार/सरकारें प्रदेश के लोगों के प्रति कहीं भी ओर किसी भी स्तर पर गंभीर होती तो लोगों को भी लगता। मकानों के रिटेंशन का मामला सरकार की नाकामी की वजह से न्यालय में पहंचा।क्योंकि शुरू से ही सरकारों ने इस ओर अपनी ओर से समय रहते परिपक्वता ओर थोड़ी सी भी दिलचस्पी दिखाई होती,यानी लोगों के मकानों को एक मुश्त As is where is basis पर वो भी बिना किसी पूर्व शर्त के नियमित किआ होता तो लोगों को अब तक काफी राहत महसूस हुई होती। तथा लोगों के पास सोचने का आलम यह होता कि जब उनके मकान बन कर त्यार होंगे ओर नियमित होने की एवज में वे उन्हें अच्छे किराये पर/पट्टे पर और उसमे ओर किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों के चलाने से उन्हें कुछ आमदनी हासिल होती। नजीजतन मकान मालिक सबसे पहलेे अपने कर्जे निपटाने में सक्षम होते दिखते।क्योंकि लोगों ने अपने उपर जो लाखों/करोड़ों रुपयों बैंकों से कर्ज के रूप में लोन लिया वो भी भारी भरकम ब्याज पर,यहां तक कि लोगों ने अपने गहने इत्यादि तक गिरवी रखे।जिस कारण लोगों को बैंकों की महीने वार मोटी किश्तें उक्त कारणों से अदा नहीं हो पा रही है।उपर से ब्याज के कारण कर्जों में इजाफा हो रहा है। इन लोगों का कसूर सिर्फ इतना था कि इन्होंने ने अपने बाल बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपने खून पसीने की कमाई को मकानों में ठूंस दी?इस बात का जवाब उन्हें कोन देगा? बनता तो ये था कि सरकार कम से कम उक्त लोगों के कर्जे/लोन का ब्याज बहन करती जब तक उनके मकान नियमित नहीं ही जाते।लेकिन सरकार की तरफ से लोगों को किसी भी तरह की कोई सहायता नहीं हुई।आलम ये रहा की लोग ठोकरें खाने को आज भी मजबुर है। आम आदमी पार्टी का ये भी सरकार पर आरोप है की लोगों के मकानों को एक मुश्त नियमित न करके इसे लटकाना ओर फिर इस विषय का न्यालय तक पहुंचना कहीं न कहीं सरकार की आंख मिचौली का एक पहलू है। चलो जो भी माजरा है। हम नहीं जानते ये सरकार की ड्यूटी थी ओर है कि वो कोर्ट में केसे निपटे?ये सरकार की सिरदर्दी है। जो मर्जी करें।हमारी मांग तो यह है कि लोगों को इसी साल के अंत तक मकान नियमित चाहिए।इसके लिए सरकार को चाहिए कि अभी होने वाले विधान सभा सत्र में इस विषय को लेकर एक विशेष बिल पास करें जो कानून की शक्ल लेकर मकानों को एक मुश्त नियमित करने का जिससे रास्ता प्रशस्त हो जाए।यदि यहां पर कोई पेचीदगी आड़े आती हो तो सरकार का इसे लोक सभा में भी पास करवाना बनता है।क्योंकि डबल इंजन की गाड़ी होते हुए ये संभव भी हो सकता है।ताकि पूरा देश को भी इस परिधि में ला कर कानून बनाया जा सके और आने वाले समय में लोगों को ज्ञात रहे की कानून की उलंगना न हो और उस दायरे तक ही सीमित होने के लिए वो बाध्य हों जाएं।

यहां जारी एक बयान में प्रवक्ता एस ० एस० जोगटऻ ने आगे कहा कि उक्त लोगों को एक मुश्त सहारा देने के इलावा अब कोई चारा नहीं है।इसलिए सरकार इस बाबत नियम बनाए ताकि लोगों को एक मुश्त राहत प्रदान करवाई जा सके।क्योंकि आजतक इस बाबत नियमो के अभाव में लोगों ने अपने हिसाब से काम मकान बनवाए तथा इस आड़ में भी की प्रदेश में खासकर शिमला में सरकारी भवन दस या इससे भी ज्यादा मंजिलों के बने है ओर बन भी रहे है।इसी तरह प्रभाव शाली लोगों की बहुमंजली इमारतें नियमित होती रही है।यदि ऐसा था तो फिर वो कर्जा लेकर मकान बनाने वाले लोग भी तो इसी धरती पर मकान बना रहे!न की डिजनी लैंड में बना रहे है।उक्त लोग भी तो इसी धरती के बाशिंदे है। फिर ये कई तरह के माप दंड क्यों?आम आदमी इन तमाम पहलुओं पर नजर रखे हुए है।प्रवक्ता का कहना कि समय रहते यदि सरकार लोगों के प्रति किसी तरह की रुचि नहीं दिखाती है तो 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर इस विषय अर्थात नए ओर पुराने पुश्तैनी मकानों को नियमित करने की राह को अमली जामा पहनाया जाएगा।

By RIGHT NEWS INDIA

RIGHT NEWS INDIA We are the fastest growing News Network in all over Himachal Pradesh and some other states. You can mail us your News, Articles and Write-up at: News@RightNewsIndia.com

error: Content is protected !!