इस देश में लोगों को करनी पड़ती है रोने की प्रैक्टिस, जो सही से नही रोता वह हो जाता है गायब, जानें क्या है वजह

0
2

पूरी दुनिया में आज भी एक ऐसे देश हैं जहां तानाशाही का शासन चलता है. यहां न तो लोकतंत्र है और ना ही लोगों के कोई अधिकारी. इन देशों में लोगों को राजा या तानाशाह के इशारों और इच्छाओं के मुताबिक, काम करना पड़ता है.

इन्हीं में से एक देश है उत्तर कोरिया. जो हमेशा वहां के तानाशाह किम जोंग उन की वजह से चर्चा में रहता है. आज हम आपको उत्तर कोरिया के कुछ ऐसे रूल्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें जानकर यकीनन आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. उत्तर कोरिया में तमाम अजीबोगरीब रिवाजों में से एक ये भी रिवाज है कि यहां के शासक की मौत के बाद हर नागरिक को रोना पड़ता है.

यही नहीं जो कम रोता है उसे शासक का परिवार कठोर दंड भी देता है. बता दें कि साल 2011 में किम जोंग उन अपने पिता किम जोंग इल की मौत के बाद उत्तर कोरिया का सर्वोच्च नेता बना था. उसका दादा किम-II सुंग उत्तर कोरिया के संस्थापक और पहला नेता था. जिनकी मौत साल 1994 में हुई थी. इसके बाद किम जोंग उन के पिता किम जोंग इल ने सत्ता संभाली. कहते हैं कि उत्तर कोरिया के हर घर में किम जोंग के पिता और उनके दादा की तस्वीरें लगाना अनिवार्य है.

बताया जाता है कि किम जोंग इल की मौत के बाद प्रजा को शोक सभा में खुलकर रोने का आदेश मिला. इस शोक सभा में लोग पूरे दम से चिल्ला-चिल्लाकर और छाती पीटकर रोए और जो ठीक से नहीं रो सका, वो अगले ही दिन गायब हो गया. इस बात की मीडिया में भी काफी चर्चा रही थी. डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, शासक की मौत के बाद नए राजा किम जोंग उन ने पिता के लिए बहुत सी शोकसभाएं रखीं. इन शोकसभाओं में जनता को आकर रोकर ये साबित करना था कि वे पुराने राजा से प्यार करते थे.

इन शोकसभाओं में रोना किम परिवार के लिए उनकी वफादारी का भी सबूत था. रिपोर्ट के मुताबिक, ये शोकसभाएं 10 दिनों तक चलीं, जिसमें युवा, बच्चे, बूढ़े, औरत-मर्द सबके लिए रोना अनिवार्य था. इतना ही नहीं इन शोकसभाओं के दौरान ये नोट किया गया कि कौन-कौन उतनी ठीक तरह से नहीं रो रहा था. इसे किम परिवार के प्रति वफादारी में कमी माना गया.

10 दिन की शोकसभा के बाद क्रिटिसिज्म सेशन हुआ, जिसमें किम खुद उपस्थित थे. इस सेशन में तय हुआ कि ठीक से नहीं रोने वालों को तुरंत 6 महीने की कड़ी कैद में रखा जाए. इसके बाद हजारों दोषियों को रातोंरात घर से उठा लिया गया. कम रोने की वजह से बहुतों का पूरा का पूरा परिवार ही महीनों लेबर कैंप में डाल दिया गया.

समाचार पर आपकी राय: