वैज्ञानिकों की चेतावनी…इंसानों की वजह से धरती पर आएंगे Alien जीव

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हम इंसानों की वजह से ही Alien जीव धरती पर घुसपैठ करेंगे. हम इंसान ही उन्हें धरती पर आने का मौका दे रहे हैं. यह मौका भविष्य में और बढ़ने वाला है. यानी इंसान की पहुंच जितनी ज्यादा अंतरिक्ष में बढ़ेगी, Alien जीवों के पृथ्वी पर हमले की आशंका बढ़ती चली जाएगी. हाल ही में एक रिसर्च पेपर में यह दावा किया गया है.

यह रिसर्च पेपर हाल ही में BioScience जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इसके मुताबिक इंसान जितनी ज्यादा अंतरिक्ष यात्राएं करेगा, उतने ज्यादा एलियन जीव अंतरिक्षयानों के साथ धरती पर लौटेंगे. हो सकता है कि ये जीव आपको आंखों से दिखाई न दे. लेकिन धरती के वायुमंडल में आने के बाद ये यहां के जीवों के बीच घुसपैठ करके बड़ा खतरा बन सकते हैं.

मॉन्ट्रियल स्थित मैक्गिल यूनिवर्सिटी में इन्वेशन बायोलॉजी के प्रोफेसर एंथनी रिकियार्डी ने बताया कि इंसानों की अंतरिक्ष में जाने की चाहत उन्हें एलियन जीवों की समस्या से रूबरू कराएगी. इंसान जितना ज्यादा अपने अंतरिक्षयानों को स्पेस में ले जाएंगे, उन्हें उतना ज्यादा एलियन जीवों का सामना करना पड़ेगा. हो सकता है कि ये जीव बेहद सूक्ष्म हों. लेकिन ये आपके यान के साथ धरती पर वापस लौट सकते हैं. ऐसे में अगर इन्होंने धरती पर अपना घर बना लिया तो ये धरती पर मौजूद जीव-जंतुओं पर असर डाल सकते हैं.

एंथनी रिकियार्डी ने कहा कि यही हाल धरती के सूक्ष्म जीव-जंतुओं का भी है. वो भी यान के साथ अंतरिक्ष में जाकर किसी और ग्रह या वस्तु पर अपना घर बना सकते हैं. यानी दोनों तरफ से जीव-जंतुओं का प्रदूषण बढ़ेगा. एंथनी और उनके साथी चाहते हैं कि एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल लाइफ पर एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट और इनवेशन बायोलॉजिस्ट मिलकर काम करें. तभी इस तरह की समस्याओं का समाधान होगा.

वैज्ञानिकों का कहना है अंतरिक्षयानों से आने वाले एलियन जीव ज्यादातर सूक्ष्म होंगे यानी बैक्टीरिया या उसके आकार के. साइंटिस्ट इसे अंतरग्रहीय प्रदूषण कह रहे हैं. हालांकि ये बात भी सच है कि फिलहाल इसकी आशंका बेहद कम है. लेकिन जिस तरह से इंसान तेजी से स्पेस की तरफ जा रहे हैं, उससे इनके धरती पर आने की समस्या बढ़ेगी. इसे रोकना मुश्किल होगा. अगर वैज्ञानिक अंतरिक्ष से आने वाले यानों की बारीकी से जांच करें तो हो सकता है कि उन्हें कुछ एलियन जीव उसपर चिपके हुए मिल जाएं. 

इंसानों ने जीवों को इधर-उधर भेजकर इस तरह की समस्या पहले भी बढ़ाई है. उदाहरण के लिए दक्षिण अमेरिका में पाया जाने वाला फंगस ऑस्ट्रोपुसिनिया सिडी (Austropuccinia psidii) को ऑस्ट्रेलिया में लाया गया. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया से यूकेलिप्टस के पेड़ खत्म होने लगे. अब ऑस्ट्रेलिया में इस फंगस की वजह से यूकेलिप्टस के पेड़ बेहद कम बचे हैं

साल 2019 में इजरायली बेरेशीट स्पेसक्राफ्ट में टार्डिग्रेड्स (Tardigrades) नामक सूक्ष्म जीवों को भेजा गया था. यह स्पेसक्राफ्ट चांद की सतह से टकरा खत्म हो गया. टार्डिग्रेड्स ऐसे जीव होते हैं जो बेहद खराब स्थितियों में भी जीवित रहते हैं. वो स्पेस के वैक्यूम में भी जिंदा रहते हैं. हालांकि साल 2021 में एक स्टडी प्रकाशित हुई जिसमें कहा गया कि इजरायली स्पेसक्राफ्ट के साथ गए टार्डिग्रेड्स टक्कर की वजह से मारे गए. लेकिन मुद्दा ये है कि इंसानों ने एक सूक्ष्म जीव को चांद पर तो भेजा. यानी धरती के जीव को दूसरे ग्रह पर. इसका मतलब ये है कि दूसरे ग्रहों से भी तो सूक्ष्म जीव धरती पर आते होंगे.

एंथनी कहते हैं कि नासा (NASA) जैसी अंतरिक्ष एंजेसियां जैविक प्रदूषण के खतरे से पूरी तरह वाकिफ हैं. इसलिए साल 1960 से ही प्लैनेटरी प्रोटेक्शन पॉलिसीज बनाई गई हैं. लेकिन जिस तरह से अंतरिक्ष में इंसान अपनी बाहें फैला रहा है. दूसरे ग्रहों को एक्सप्लोर कर रहा है. यानों को दूसरे ग्रहों पर भेजकर वापस धरती पर बुला रहा है, ऐसे में पूरी संभावना है कि दूसरे ग्रहों के एलियन जीव (Alien Organisms) धरती पर आ रहे हों.

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