22 दिसंबर को लांच होगा जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप, जानिए हबल से कितना बहेतर

नासा (NASA) का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) इस महीने की 22 तारीख को अंतरिक्ष के लिए प्रक्षेपित किया जाएगा. इस टेलीस्कोप से वैज्ञानिकों को बहुत उम्मीदें हैं. इस समय अंतरिक्ष में स्थापित टेलीस्कोप में से सबसे शक्ति शाली टेलीस्कोप नासा के ही हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) को ही माना जाता है. फिर भी जेम्स वेब टेलीस्कोप को भी एक बहुत महत्वपूर्ण टेलीस्कोप माना जा रहा है. ऐसे में जेम्स वेब की तुलना हबल से की जा रही है तो हैरानी की बात नहीं है. इस तुलना को लेकर नासा का कहना है कि वह जेम्स वेब को हबल का उत्तराधिकारी है.

विकल्प या उत्तराधिकारी
कई वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि जेम्स वेब टेलीस्कोप हबस स्पेस टेलीस्कोप का विकल्प है लेकिन अगर दोनों ही टेलीस्कोप को ध्यान से देखा जाए तो इतना आसानी से दोनों को अलग अलग करके नहीं देखा जा सकता है. इसक वजह दोनों की अलग अलग क्षमताएं हैं. यही वजह है कि दोनों की तुलना पर ऐसी बहस देखने को मिल रही है.

31 साल पुराना हबल
अगर हबल स्पेस टेलीस्कोप की बात की जाए तो यह पृथ्वी की निचली कक्षा में साल 1990 में स्थापित किया गया था. पिछले 31 सालों में हबल ने 14 लाख अवलोकन किए हैं जिसमें अंतरतारकीय पिंडों के अवलोकन गुरु ग्रह से धूमकेतु टकराने की घटना को भी तस्वीर में कैद करने, और प्लूटो के चंद्रमाओं की खोज करना भी शामिल हैं.

हबल के उपकरण
हबल टेलीस्कोप एक ऑप्टिकल टेलीस्कोप है, यानि वह सुदूर अंतरिक्ष से आने वाली प्रकाश की किरणों को पकड़ सकता है. उसके पांच प्रमुख उपकरण, विद्युतचुंबकीय स्पैक्ट्रम में  पराबैंगनी प्रकाश, दिखाई देने वाला प्रकाश और नियर इंफ्रारेड के तरंगों को पकड़ सकता है. उसने गैलेक्सी के विलयों को पकड़ने, सुपरमासिव ब्लैक होल की पड़ताल, और हमारे ब्रह्माण्ड के इतिहास को समझने में भी मददगार साबित हुए हैं.

जेम्स के चार उपकरण
जेम्स वेब स्पेस टेलस्कोप में चार वैज्ञानिक उपकरण होते हैं. ये प्रमुख रूप से इंफ्रारेड तरंगों का अवलोकन करेगा जिसमें वह 0.6 से 28 माइक्रॉन की तरंगों को पकड़ सकेगा. वहीं हबल के उपकरण 0.8 से लेकर 2.5 माइक्रॉन की तरंगें पकड़ पाते हैं. जबकि विद्युतचुंबकीय स्पैक्ट्रम इंफ्रारेड तरंगों की वेवलेंथ 0.7 से 100 माइक्रॉन तक होती हैं.

दोनों टेलीस्कोप के आइने
हबल और वेब के मूल आइने में भी अंतर है. जहां वेब का मूल आइना 6.5 मीटर व्यास का है . हबल के व्यास 2.4 मीटर का है. इसलिए वेब का कैमरा हबल के कैमरे की तुलना में ज्यादा बड़े क्षेत्र को देख सकता है. वेब की सूर्य से बचाव करने वाली शील्ड भी बड़ी है जो करीब 22 मीटर लंबी और 12 मीटर चौड़ी है.

दोनों की कक्षा
हबल पृथ्वी के करीब 570 किलोमीटर की ऊंचाई पर उसका चक्कर लगा रहा है. वहीं वेब पृथ्वी की चक्कर नहीं लागएगा. यह पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित रह कर सूर्य की चक्कर लगाएगा. वह पृथ्वी के साथ ही सूर्य का चक्कर लागएगा. इस तरह से यह पृथ्वी और सूर्य की तुलना में एक ही जगह पर स्थिर रहेगा.

बेशक जेम्स वेब हबल से काफी अलग और कई मायनों में बेहतर क्षमताओं वाला टेलीस्कोप साबित होगा. जबां हबल कई शिशु गैलेक्सी देख सकता है, तो वहीं वेब नवजात गैलेक्सी  देखने में सक्षम होगा. वह गैलेक्सी के शुरुआती रूप, बाह्यग्रह और तारों की उत्पत्ति भी देख सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि काफी हद तक जेम्स वेब हबल की बहुत सी कमियों को भी पूरा कर सकेगा और उससे आगे भी जा सकेगा.

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