चुनाव आयोग की घोषण के बाद आजकल हिमाचल में चुनावी माहौल गर्म है। हर ओर चुनावों की चर्चा, चुनावों का प्रचार और एक दूसरे को हराने के लिए जबरदस्त दांव पेंच लड़ाए जा रहे है। उम्मीदवारों ने अपनी अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है और अपने अपने क्षेत्रों में पूरे दमखम के साथ उतर चुके है। सभी अपने अपने समर्थकों की फौज के साथ मैदान में आर पार की लड़ाई में शामिल हो चुके है।

यहां तक सब सही है आमने सामने की लड़ाई लड़ो और हार जीत का फैसला जनता पर छोड़ दो। लेकिन गृह मंत्री के जिले में एक अजब से क़िस्सा सामने आया है। मंडी जिले के सुंदरनगर उपमंडल में एक समाजसेवी ने चुनाव लड़ने की घोषणा सोशल मीडिया पर क्या की। उनके पूरे परिवार और समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गए। मिली जानकारी के मुताबिक समाजसेवी का नाम रूपेश कुमार है और उन्होंने अजब तरीके से सोशल मीडिया पर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। रूपेश कुमार की पोस्ट सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा वायरल हुई है।
उन्होंने लिखा था;
“घांघल पंचायत से सबसे बदनाम और बेईमान उम्मीदवार”
“सबका साथ, मेरा विकास”
“आपका अपना बेईमान और बदनाम उम्मीदवार”
“आपका भाई रूपेश कुमार”

वायरल पोस्ट

समाजसेवी रूपेश कुमार की इस सोशल मीडिया पोस्ट का खौफ इस कदर हावी हुआ कि उनका, उनकी पत्नी, माता और पिता समेत उनके कई समर्थकों के वोट वोटर लिस्ट से गायब हो गए। आज जब उन्होंने अपनी पंचायत से वोट गायब पाया तो आस पास की सभी पंचायतों में भी पता किया। लेकिन उनके परिवार और समर्थकों के वोट पाए गए।

हिमाचल में इस तरह की धांधली का यह पहला मामला है जहां पूरे परिवार के वोट गायब हो गए। रूपेश कुमार ने इस बारे शिकायत करने और उनके वोट गायब करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की मांग की है। उनका कहना है कि अगर यह किसी उम्मीदवार के इशारे पर किया गया है तो निर्वाचन आयोग इस मामले में दोषी उम्मीदवार का नामांकन रद्द करे। यह मेरे और मेरे परिवार के लोकतांत्रिक अधिकारों की खुली हत्या है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस मामले में कार्यवाही नही हुई तो वह प्रदर्शन से भी गुरेज नही करेंगे।

इस संबंध में जब हमने निर्वाचन अधिकारी सुंदरनगर से बात करने की कोशिश की तो पहले तो वहां किसी ने कॉल नही उठाया। जब कॉल उठाया तो निर्वाचन अधिकारी एसडीएम सुंदरनगर के व्यस्त होने के कारण उनसे बात नही हो पाई। जबकि यह एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है। 13 बर्ष से वोट देने वाले रूपेश कुमार और सालों से वोट दे रहे उनके माता पिता का वोट क्यों वोटर लिस्ट से गायब है। सुंदरनगर के कुछ प्रमुख लोगों ने इस मामले में निर्वाचन अधिकारी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए है।

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