New Delhi News: अगर आप 2026 में नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपको ज्यादा पैसे खर्च करने के लिए तैयार रहना होगा. ग्लोबल बाजार में मेमोरी चिप संकट के कारण स्मार्टफोन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी होने की आशंका है. खासतौर पर भारत जैसे बाजार में जहां बजट फोन की मांग ज्यादा है, वहां इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है.
ग्लोबल शिपमेंट में भारी गिरावट के आसार
रिसर्च फर्म इंटरनेशनल डेटाकॉर्पोरेशन (IDC) के अनुसार, 2026 में दुनियाभर में स्मार्टफोन शिपमेंट में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है. 2025 में जहां करीब 1.26 अरब स्मार्टफोन शिप किए गए थे, वहीं 2026 में यह संख्या घटकर लगभग 1.12 अरब यूनिट रह सकती है. इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत है.
100 डॉलर से कम वाले फोन होंगे गायब
विशेषज्ञोंका मानना है कि आने वाले समय में 100 डॉलर (करीब 8-9 हजार रुपये) से कम कीमत वाले स्मार्टफोन बाजार से लगभग गायब हो सकते हैं. IDC का अनुमान है कि 2026 में स्मार्टफोन की औसत कीमत में लगभग 14 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है. पिछले एक दशक में सस्ती कीमतों ने स्मार्टफोन को हर वर्ग तक पहुंचाया था, लेकिन अब उस पर दबाव बढ़ सकता है.
कई फोन की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं
मेमोरीचिप की बढ़ती कीमतों का असर अब बाजार में दिखने लगा है. iQOO Z10 और Vivo T4 5G की कीमत में लगभग 2000 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी गई है. वहीं iQOO Z10x और Vivo T4x 5G के अलग-अलग स्टोरेज वेरिएंट की कीमतों में 1500 से 2500 रुपये तक का इजाफा हुआ है.
प्रीमियम फोन भी नहीं बचे
सिर्फ बजट फोन हीनहीं, बल्कि महंगे स्मार्टफोन भी इस संकट से अछूते नहीं हैं. हाल ही में लॉन्च हुई Samsung Galaxy S26 सीरीज के बेस मॉडल की कीमत करीब 6000 रुपये ज्यादा रखी गई, जबकि Samsung Galaxy S26 Ultra की कीमत में लगभग 10,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई.
AI की मांग से बढ़ा संकट
मेमोरीचिप्स की कमी का एक बड़ा कारण दुनिया भर में तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक है. Meta, Google और Microsoft जैसी टेक कंपनियां बड़े पैमाने पर AI डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मेमोरी चिप्स खरीद रही हैं. इस वजह से स्मार्टफोन और पीसी बनाने वाली कंपनियों के लिए चिप्स की उपलब्धता कम हो रही है और उन्हें ज्यादा कीमत पर खरीदना पड़ रहा है.
भारतीय ग्राहकों पर क्या होगा असर?
बदलतेहालात यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में भारतीय ग्राहकों को अल्ट्रा-बजट फोन के कम विकल्प, औसत कीमत में बढ़ोतरी और फोन अपग्रेड करने का लंबा अंतराल देखने को मिल सकता है. यानि सस्ते स्मार्टफोन खरीदना अब पहले जितना आसान नहीं रह सकता.

