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साहब! पूरा परिवार लाचार, दवा के भी नहीं पैसे, CM सुक्खू को भेजी चिट्ठी पढ़कर रो पड़ेंगे आप

Bilaspur News: बिलासपुर की ग्राम पंचायत जुखाला में एक परिवार बेहद दर्दनाक हालात में जी रहा है। गांव आशा मजारी के निक्कू राम का पूरा कुनबा दिव्यांगता और बीमारी से जूझ रहा है। भीषण आर्थिक तंगी ने इनकी कमर तोड़ दी है। अब इस बेबस परिवार ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मदद की गुहार लगाई है। पीड़ित ने सीएम को ज्ञापन भेजकर मानवीय आधार पर तत्काल सहायता मांगी है।

32 साल पहले एक हादसे ने तोड़ी रीढ़

निक्कू राम पहले एक कुशल मिस्त्री थे और मेहनत से घर चलाते थे। करीब 32 साल पहले एक मकान बनाते समय वह ऊंचाई से गिर गए। इस हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। वह 7-8 साल तक बिस्तर पर ही रहे। आज वह 70 फीसदी दिव्यांग हैं और सही से चल-फिर भी नहीं सकते। उस एक घटना ने उनकी हंसती-खेलती दुनिया उजाड़ दी।

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दिव्यांग पति ही है पैरालाइज्ड पत्नी का सहारा

मुसीबतें यहीं खत्म नहीं हुईं। निक्कू राम की पत्नी सवित्री देवी मानसिक रोगी हैं। वह 77 फीसदी दिव्यांग और पूरी तरह लकवाग्रस्त (Paralyzed) हैं। वह बिस्तर से उठ भी नहीं सकतीं। निक्कू राम खुद लाचार हैं, फिर भी पत्नी की सेवा करते हैं। वह दिन में दो बार पत्नी की मालिश करते हैं। मालिश न करने पर पत्नी का शरीर अकड़ जाता है।

बेटों की हालत देख पसीज जाएगा दिल

इस परिवार पर कुदरत की मार लगातार पड़ी है। इनका बड़ा बेटा विजय कुमार मानसिक रूप से बीमार है। वह 85 फीसदी दिव्यांग है। उसे भी पिता की तरह हर पल देखभाल चाहिए। छोटा बेटा राजकुमार आंखों से देख नहीं सकता। उसकी कमर में भी प्लेट लगी है। इस कारण वह कोई भारी काम करके पैसे नहीं कमा सकता।

दवा का खर्च 19 हजार, पेंशन भी बंद

परिवार के पास कमाई का कोई पक्का जरिया नहीं है। इनके पास थोड़ी जमीन है, लेकिन जंगल के कारण वहां खेती नहीं हो सकती। परिवार का गुजारा ‘सहारा योजना’ की पेंशन से चलता था। दुख की बात है कि पिछले 6-7 महीने से यह पेंशन भी बंद है। घर में हर महीने दवाइयों पर ही 18 से 19 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। कई बार इनके पास मोबाइल रिचार्ज तक के पैसे नहीं होते।

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सीएम सुक्खू से आखिरी उम्मीद

निक्कू राम ने सीएम को एक बेहद भावुक पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि अगर समय पर मदद नहीं मिली तो परिवार का बचना मुश्किल है। उन्हें पितृ दोष निवारण के लिए गया (बिहार) जाने की सलाह मिली है। इसके लिए 50 हजार रुपये चाहिए, जो उनकी हैसियत से बाहर है। उन्होंने सरकार से नियमों से हटकर मदद करने की अपील की है।

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