लोन एप्स के कारण आत्महत्या। आरबीआई के लोन एप्स से उधार न लेने के विज्ञापन। प्ले स्टोर के सैकड़ों ऐसे एप डीलिट करने की सूचनाएं। यह सब हो चुका लेकिन फिर भी ऑनलाइन सूदखोरी का खेल जारी है। करीब 150 लोन एप, एप स्टोर पर मौजूद हैं। ओटीटी सीरीज के बीच में इनके विज्ञापन तक आ रहे हैं।

ये एप लोगों से मोटी वसूली ही नहीं कर रहे, उनकी संपूर्ण जानकारी भी चीनी सर्वर में भेज रहे हैं, जो गैर कानूनी तो है ही देश के लिए खतरनाक है। इतना ही नहीं, सिर्फ एक एप ने ही 87.15 लाख लोगों से 4,572 करोड़ रुपए की वसूली की है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाजार में चले दर्जनों एप ने कितने भारतीयों को ठगा होगा।

इस एप में 500 से 80 हजार रुपए तक की 80 लाख से ज्यादा ट्रांजेक्शन हैं। यह जानकारी चीनी सर्वर से हैक 2.18 जीबी डाटा की एक फाइल से मिली। भास्कर ने यह फाइल साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर राजशेखर राजहरिया के सहयोग से हासिल की है। आरबीआई के निर्देश पर एप स्टोर से हाल में 30 और पूर्व में 500 एप बैन हुए।

आकर्षक रखे जाते हैं एप के नाम

10 मिनटलोन, कैशगुरू, रूपीक्लिक, फाइनेंसबुद्धा, स्नेपइट लोन, होप लोन, क्विकरूपी, फ्लाईकैश, मनी बॉक्स, मास्टरमेलन, क्विक कैश, रुफीलो, क्रेडिटजी, रुपी होम।

भास्कर खुलासा

इस एक स्लाइड जैसे 1,68,166 पेज, 500 से 80 हजार रुपए तक लूट के 80 लाख से ज्यादा ट्रांजेक्शन

80% पीड़ितों ने मोबाइल बंद कर दिए

हमने एप डाटा में उपलब्ध 50 नंबरों पर कॉल किए तो पता चला कि 80% लोगों ने अपना नंबर ही बंद करा दिया। एप्स कंपनियों की धमकी-प्रताड़ना से परेशान होकर पीड़ितों ने ऐसा किया।

युवती की सगाई भी फोन करके तुड़वा दी
कपिल (बदला नाम) ने बताया कि उसकी बहन ने एप से लोन लिया, बताया भी नहीं। ब्लैकमेलिंग होने लगी, तब पता चला। एक माह पहले उसकी सगाई हुई थी। संभलते तब तक प्रिया के होने वाले ससुराल वालों तक लोन वसूली वालों ने मैसेज, फोटो भेजने शुरू कर दिए। परिणाम ये हुआ कि उसकी सगाई टूट गई।

लोकेशन ट्रेस कर मार डालने की धमकी दी
उदयपुर के राहुल मेघवाल के मोबाइल से तो एप वालों ने कॉन्टेक्ट्स, फोटो इत्यादि चुरा लिए और वसूली के लिए गालियों के साथ जान से मारने की धमकी तक देनी शुरू कर दी। उनकी लोकेशन ट्रेश करने तक का दावा भी करने लगे थे। तब राहुल ने मामला दर्ज कराया। हालांकि इसके बाद भी धमकियां मिलती रहती हैं।
रिश्तेदार, दोस्तों से भी शुरू कर दी वसूली
हावड़ा जिले के स्नेहाशीष मंडल ने 3 हजार का लोन लिया। मिले 2200 रुपए ही। वूसली 4200 रुपए की हुई। फिर भी लोन खत्म नहीं हुआ। रिकवरी एजेंटों ने प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इसके लिए मंडल के मोबाइल से चुराए कॉन्टैक्ट नंबरों पर दोस्तों व रिश्तेदारों को भी धमकियां व गालियां देनी शुरू कर दीं।

डरें नहीं, इनके जैसा जज्बा लाएं : सुसाइड करने वाली थीं अब तीन दर्जन पीड़ितों की मददगार

स्नेहा (गांधीनगर) कई महीनों से ऑनलाइन सूदखोरों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। कई पीड़ित उनसे जुड़े हैं। जबकि पहले वें खुद आत्महत्या के विचार तक पहुंच गई थीं। दरअसल लॉकडाउन के दौरान उन्होंने 11,500 रुपए के लिए तीन एप पर एप्लाई किया। एक में 3500 लोन के बदले 2000, दूसरे में 5000 लोन की जगह 3525 और तीसरे में 3000 लोन की जगह 1800 रुपए मिले।

खाते में 7325 रुपए ही आए। बाकी रकम फाइल चार्ज या प्रोसेसिंग फीस के रूप में काट ली गई। जरूरत ध्यान रखते हुए उन्होंने कुछ नहीं कहा और ये लोन चुका भी दिए। लेकिन बाद में मोबाइल कॉल, वॉट्सएप, मैसेंजर पर भद्दी गालियां दी जातीं।

थोड़ी-थोड़ी देर में ऐसा हाेता। फिर परिवार, परिचित, दोस्त या रिश्तेदारों के मोबाइल पर भी धमकियां शुरू हो गईं। यहां तक फोनबुक के नंबरों का वॉट्सएप ग्रुप बनाकर स्नेहा को चोर बताना शुरू कर दिया। हालात ऐसे बने कि वे आत्महत्या की सोचने लगी। लेकिन फिर एक साइबर एक्सपर्ट मिला तो नई राह खुली। थाने में केस दर्ज कराया। पुलिस की लगातार मदद से राहत मिली तो दूसरों की मदद की ठान ली। स्नेहा अब तक करीब तीन दर्जन पीड़ितों की मदद कर केस दर्ज करवा चुकी हूं। कर्नाटक में तो चार गिरफ्तारियां तक उनके कारण हुई हैं।

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