शिमला के सब्जी व्यापारी ने भी 6 लाख में खरीदा था पुलिस भर्ती प्रश्न पत्र, ऐसे आया पकड़ में

शिमला। Himachal Pradesh Police Paper Leak, हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल की लिखित परीक्षा के पेपर लीक मामले के तार शिमला जिला से भी जुड़ गए हैैं। ऊपरी शिमला में सब्जी के कारोबार करने वाले एक युवक ने छह लाख में पेपर खरीदा था। शिमला के छह युवकों को सिरमौर में अलग-अलग जगह परीक्षा के प्रश्न और उत्तर रटवाए गए। जब इनके दस्तावेजों की जांच हो रही थी, तब पुलिस अधिकारियों को भर्ती परीक्षा में लिए गए अंकों पर शक हो गया था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार जिस युवक के 80 में से 72 अंक थे, उससे पुलिस अधिकारी ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह जिले का नाम पूछा तो उसने ऊना बताया। इससे कुछ और प्रश्न भी पूछे गए थे, लेकिन इसके उत्तर भी सही नहीं दिए। लेकिन, तब पेपर लीक होने का मामला दर्ज नहीं किया था। जैसे ही कांगड़ा जिले में मामला दर्ज हुआ।

इसके बाद शिमला पुलिस ने लिखित परीक्षा के टापरों को पूछताछ के लिए बुलाया। सबसे पहले गलत उत्तर देने वाले से पूछताछ की। उसने बताया कि छह लाख में पेपर खरीदा है। पैसे लोगों से उधार लिए थे। नौकरी लगने के बाद इन पैसों को चुकाया जाना था। शिमला पुलिस ने अभी किसी की भी गिरफ्तारी नहीं की है, लेकिन जल्द ही कार्रवाई हो सकती है।

ऐसे हुई डील

शिमला पुलिस के रडार पर छह युवक हैं। इन पर पेपर खरीदने का आरोप है। उन्होंने पूछताछ में बताया है कि उन्हें पेपर बेचने वाले गिरोह के सदस्य सिरमौर जिला में ले गए। गाडिय़ां अज्ञात जगह पर पहुंचाई गई, वहां पेपर दिखाया गया। इसके प्रश्न रटाए और उत्तर भी बताए गए। पैसा नकद लिया गया। यह बात मार्च की है। तब लिखित परीक्षा की तारीख तय हुई ही थी।

युवक का परिवार कई साल से रह रहा हिमाचल में

जिस युवक पर पेपर खरीदने के आरोप हैं, उसका परिवार पिछले 40-50 साल से ऊपरी शिमला में रह रहा है। अन्य पांच जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के बताए जा रहे हैं। सबने पेपर लीक की एक जैसी कहानी बताई है।

10 लाख मांगे थे पेपर के बदले

सोलन जिले में वाट्सएप चैट की वायरल वीडियो की जांच से पता चला है कि आरोपित को परीक्षा से पहले पेपर लीक करने के बदले 10 लाख की मांग की गई थी, लेकिन उसके पास इतनी राशि नहीं थी। उसने अपने दोस्तों को यही बात बताई। उन्होंने भी पैसे देने से इन्कार किया। सोलन पुलिस की जांच कहती है आरोपितों में से एक बीएससी है। इसके लिखित परीक्षा में 65 अंक आए हैं। फस्र्ट वाट्सएप काल डिलीट होने के कारण पुलिस असली व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रही है। अगर यह डाटा फारेंसिक साइंस प्रयोगशाला से पुनर्जीवित हो गया तो फिर कई राज खुलेंगे।

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