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शिमला स्कूल कांड: बच्चे के कान का पर्दा फटने और बिच्छूबूटी डालने के गंभीर आरोप, तीन शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज

Himachal News: शिमला के रोहड़ू उपमंडल स्थित एक स्कूल में कक्षा एक के छात्र के साथ कथित यातना का मामला सामने आया है। पीड़ित बच्चे के पिता की शिकायत पर पुलिस ने प्रधानाध्यापक देवेंद्र कुमार सहित तीन शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपों में बच्चे के कान का पर्दा क्षतिग्रस्त होना और उसकी पैंट में बिच्छूबूटी डालना जैसी गंभीर बातें शामिल हैं।

क्या हैं मुख्य आरोप

पुलिस शिकायत में दावा किया गया है कि स्कूल के प्रधानाध्यापक और दो अन्य शिक्षक बाबू राम व कृतिका ठाकुर पिछले कई महीनों से बच्चे को नियमित रूप से पीट रहे थे। इस लगातार मारपीट के कारण बच्चे के कान से खून बहने लगा और उसका कान का पर्दा क्षतिग्रस्त हो गया। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि शिक्षक बच्चे को स्कूल के शौचालय में ले जाकर उसकी पैंट में बिच्छूबूटी डाल देते थे। यह एक कांटेदार पौधा है जिसके संपर्क में आने से तेज जलन और खुजली होती है।

धमकियों और अवैध शिक्षण के आरोप

पिता ने पुलिस को बताया कि शिक्षक उनके बच्चे को लगातार धमकाते थे। उनका आरोप है कि 30 अक्टूबर को प्रधानाध्यापक ने बच्चे को स्कूल से निकालने की धमकी दी और कहा कि अगर मामला सार्वजनिक हुआ तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। शिकायत में एक और गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि शिक्षिका कृतिका ठाकुर के पति नितीश ठाकुर पिछले एक साल से स्कूल में अवैध रूप से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। शिक्षकों ने पिता को पुलिस में शिकायत दर्ज न करने की चेतावनी भी दी थी।

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कानूनी कार्रवाई और लगाए गए मुकदमे

पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इनमें गलत तरीके से कैद में रखने, स्वेच्छा से चोट पहुंचाने और आपराधिक धमकी देने जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चे के प्रति क्रूरता के मामले भी दर्ज किए गए हैं। ये प्रावधान जबरन कपड़े उतारने और मानव गरिमा के विरुद्ध अपमानजनक कृत्यों से संबंधित हैं।

पुलिस की भूमिका पर उठते सवाल

इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि आरोपी शिक्षकों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। इसी कारण तीनों शिक्षकों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और नए सबूत मिलने पर अन्य धाराओं में भी मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। शिमला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने आश्वासन दिया है कि मामला गंभीरता से लिया जा रहा है।

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राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस घटना ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोपी शिक्षकों के तुरंत निलंबन और गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही पीड़ित बच्चे को सरकारी सुरक्षा, इलाज और मुआवजा दिए जाने की बात कही है। दलित अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह मामला स्कूलों में दलित बच्चों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा की गंभीर समस्या को उजागर करता है।

शिक्षा विभाग की आंतरिक जांच

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस जांच के समानांतर विभाग भी अपने स्तर पर जांच कर रहा है। उन्होंने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि सभी आरोपों की विस्तार से जांच की जा रही है। पीड़ित बच्चे के पिता ने शिकायत में बताया कि शुरू में उन्होंने बच्चे की बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब बच्चा रोजाना शिकायत करने लगा तो उन्हें गंभीरता का अहसास हुआ। इसके बाद वह पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुंचे।

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