देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच शेयर बाजारों में जोरदार गिरावट के चलते पिछले दो कारोबारी सत्रों में निवेशकों की सात लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी डूब गई है। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स बृहस्पतिवार को 740.19 अंक या 1.51 प्रतिशत के नुकसान से 48,440.12 अंक पर बंद हुआ। दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 1,611.32 अंक या 3.21 प्रतिशत टूट चुका है। सेंसेक्स में जोरदार गिरावट के बीच बीएसई की सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण दो कारोबारी सत्रों में 7,00,591.47 करोड़ रुपये घटकर 1,98,75,470.43 करोड़ रुपये रह गया है।

आज क्या रहा शेयर बाजार का हाल?
मासिक डेरिवेटिव्स अनुबंधों के निपटान के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज, इन्फोसिस और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट से बृहस्पतिवार को सेंसेक्स 740 अंक टूट गया। वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख से भी धारणा प्रभावित हुई। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 740.19 अंक या 1.51 प्रतिशत के नुकसान से 48,440.12 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 224.50 अंक या 1.54 प्रतिशत टूटकर 14,324.90 अंक पर आ गया।

किसे फायदा, किसे नुकसान?
सेंसेक्स की कंपनियों में मारुति सुजुकी का शेयर सबसे अधिक करीब चार प्रतिशत टूट गया। भारती एयरटेल, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, ओएनजीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर भी नुकसान में रहे। वहीं दूसरी ओर डॉ. रेड्डीज, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी और एचडीएफसी के शेयरों में लाभ दर्ज हुआ।

रिलायंस सिक्योरिटीज के रणनीति प्रमुख विनोद मोदी ने कहा, ‘‘एशियाई बाजारों के सकारात्मक संकेतों के बावजूद घरेलू शेयर बाजारों में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। कोविड-19 संक्रमण के मामले बढ़ने से निश्चित रूप से निवेशकों का भरोसा डिगा है।’’

3 फरवरी के बाद पहली बार हुआ ऐसा!
इसके अलावा वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) निपटान की वजह से भी बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। बीएसई का बाजार पूंजीकरण तीन फरवरी, 2021 के बाद पहली बार 20,00,00 करोड़ रुपये से नीचे आ गया पिछले दो दिन के दौरान बाजार पूंजीकरण 5,000 करोड़ रुपये से अधिक घटा है।

अन्य एशियाई बाजारों में चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग नीचे आए। वहीं जापान के निक्की और दक्षिण कोरिया के कॉस्पी में लाभ रहा। शुरुआती कारोबार में यूरोपीय बाजार नुकसान में थे। इस बीच, वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट कच्चा तेल 1.35 प्रतिशत के नुकसान से 63.54 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

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