Health News: एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने महिलाओं की यौन इच्छा से जुड़े पारंपरिक मिथकों को तोड़ दिया है। शोध में पाया गया कि महिलाओं में कामेच्छा एक निश्चित समय पर चरम पर होती है। यह प्रक्रिया जैविक, मानसिक और सामाजिक कारकों से गहराई से जुड़ी हुई है।
अध्ययन के अनुसार, महिलाओं की यौन उत्तेजना केवल शारीरिक इच्छा नहीं है। यह एक जटिल प्रक्रिया है जिस पर हार्मोन, भावनात्मक स्थिति और रिश्तों की गुणवत्ता का प्रभाव पड़ता है। थकान और मानसिक तनाव भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शोध में एक महत्वपूर्ण समय सीमा का पता चला है। अधिकांश महिलाएं सुबह 6 से 9 बजे के बीच अधिक यौन उत्तेजना महसूस करती हैं। इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण बताए गए हैं जो शरीर की प्राकृतिक लय से जुड़े हैं।
सुबह के समय चरम पर होती है कामेच्छा
सुबह के इस समय कोर्टिसोल और एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर उच्च रहता है। रात की पूरी नींद के बाद शरीर ऊर्जावान महसूस करता है। मानसिक तनाव भी इस दौरान कम होता है। रक्त संचार बेहतर होने से यौन उत्तेजना में वृद्धि होती है।
शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समय हर महिला के लिए एक समान नहीं होता। व्यक्तिगत जीवनशैली और जैविक घड़ी के आधार पर इसमें भिन्नता देखी जा सकती है। फिर भी सुबह का समय सर्वाधिक सक्रियता का समय माना गया है।
हार्मोनल चक्र का गहरा प्रभाव
महिलाओं के मासिक चक्र में होने वाले हार्मोनल बदलाव सीधे कामेच्छा को प्रभावित करते हैं। ओव्युलेशन के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर चरम पर होता है। इस दौरान यौन आकर्षण और उत्तेजना दोनों बढ़ जाते हैं।
मासिक धर्म शुरू होने से पहले कुछ महिलाओं में चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। इससे कामेच्छा में कमी आ सकती है। मासिक धर्म समाप्त होने के कुछ दिन बाद फिर से इच्छा में वृद्धि देखी जाती है। यह एक प्राकृतिक चक्र है।
उम्र और मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका
शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि 25 से 35 वर्ष की आयु तक महिलाओं में कामेच्छा अधिक सशक्त रहती है। इस आयु में हार्मोनल सक्रियता उच्च स्तर पर होती है। शरीर में ऊर्जा भी पर्याप्त मात्रा में रहती है।
चालीस वर्ष की उम्र के बाद कुछ महिलाओं में कामेच्छा में कमी देखी जाती है। वहीं कई महिलाओं में रजोनिवृत्ति तक यह सक्रिय बनी रहती है। यह व्यक्तिगत शारीरिक संरचना पर निर्भर करता है।
मानसिक तनाव और अवसाद का वीमेन हेल्थ पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आत्मसंकोच जैसी स्थितियां यौन उत्तेजना को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक सुरक्षा और संतुष्टि बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों के विचार और जागरूकता
दिल्ली के वरिष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. आदित्य कपूर ने इस बारे में अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं में कामेच्छा कोई मिथक नहीं बल्कि वैज्ञानिक सत्य है। महिलाओं में भी पुरुषों जितनी ही इच्छा होती है।
डॉ. कपूर के अनुसार इसे जानना और समझना यौन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। रिश्तों में भरोसा और स्नेह की कमी से कामेच्छा प्रभावित होती है। स्वस्थ संवाद और मानसिक सुकून इसकी नींव हैं।
आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी राय व्यक्त कर रही हैं। ऐसे में यौन स्वास्थ्य पर खुली चर्चा की महत्ता बढ़ जाती है। यह शोध साबित करता है कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे शर्म या अपराधबोध से नहीं जोड़ना चाहिए।
स्वस्थ आदतों का सकारात्मक प्रभाव
अध्ययन के मुताबिक कुछ आदतें कामेच्छा को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती हैं। नियमित व्यायाम और योग से शारीरिक ऊर्जा बढ़ती है। संतुलित आहार और पर्याप्त नींद भी महत्वपूर्ण है।
साथी के साथ खुलकर बातचीत और तनाव प्रबंधन तकनीकें फायदेमंद हैं। इन उपायों से न सिर्फ शारीरिक ऊर्जा बढ़ती है बल्कि मानसिक सुकून भी मिलता है। इससे यौन स्वास्थ्य की गुणवत्ता बेहतर होती है।
हर महिला को यह जानने का अधिकार है कि उसका शरीर कब सबसे अधिक सक्रिय होता है। यह जानकारी स्वस्थ तरीके से यौन जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है। इससे संबंध मजबूत होते हैं और समग्र स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
