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यहां बच्चे पढ़ाई घर में नही, जंगल में करते है; क्योंकि नेताओं को इनकी फिकर नही

कोरोना के कारण स्कूल बंद है और ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है। ऐसे में बच्चे अपने मोबाइल पर ही ऑनलाइन क्लास के माध्यम से पढ़ाई करते हैं। वहीं बच्चों की शिक्षा के साथ साथ अब अभिभावकों को उनकी सुरक्षा का भी डर सताने लग गया है, क्योंकि प्रदेश शिक्षा विभाग की हर घर पाठशाला मुहीम के तहत बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान कर रही है। लेकिन सरकार इस बात से अनभिज्ञ नजर आ रही है कि अभी भी प्रदेश में ऐसे कई गांव है जहां इंटरनेट का सिग्नल ही नही पहुंच पाया है। जिसके कारण अभी भी अधिकतर स्कूली बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए अपने गांव से कहीं दूर वीरान पहाड़ियों में जाकर इंटरनेट का सिग्नल तलाशना पड़ता है।

जहां उन्हें जंगली जानवरों का तो डर सताता ही है, वहीं चिलचिलाती धुप अथवा बारिश में भी काफी परेशानियां झेलनी पड़ती है। न जाने सरकार इस बात को कैसे भूल रही है कि स्कूली बच्चों कि आॅनलाइन शिक्षा का स्तर कैसा होगा।

सरयांज पंचायत के अधिकतर गांव इंटरनेट सुविधा से वंचित

कुछ ऐसा ही जिला सोलन मुख्यालय से लगभग 85 किलो मीटर दूर सरयांज पंचायत के गांव गरुडऩाग, चुडावली, नलिलान, क्वालंग, डोलरी, मनोल आदि गांव अभी भी इंटरनेट सुविधाओं से वंचित नजर आ रहे है। जिसके कारण स्कूली बच्चों को अपनी ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण करने के लिए अपने गांव से दूर किसी वीरान पहाड़ियों में जाकर सिग्नल तलाशना पड़ रहा है। जिसके कारण बच्चों की शिक्षा पर तो असर पड़ ही रहा है, वहीं दूसरी और बच्चों के अभिभावकों को भी अपने बच्चों की सुरक्षा का डर सताता रहता है, क्योंकि गांव से बाहर अधिकतर जंगली क्षेत्र पड़ता है। इसलिए कई बार कुछ बच्चों के अभिवावक बच्चों के साथ ही जंगल में रहते है। कई बार बच्चे गांव की ऊँची पहाड़ी पर बने मंदिर के प्रांगण में ही बैठकर आॅनलाइन पढाई कर लेते है लेकिन यहां भी सिग्नल समस्या बनी रहती है।

सगे संबंधियों से फोन पर बात करना भी बना चुनौती भरा काम

गांव में इंटरनेट सुविधा न होने की वजह से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो दूरभाष पर संपर्क करना मुश्किल हो जाता है। इसके अतिरिक्त किसी परिजन से भी बात करनी हो तो बड़ी ही मशक्कत के बाद फोन का सिग्नल तलाशना पड़ता है। उक्त गांव के ग्रामीणों एवं स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ग्रामीणों ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि आधुनिकता के इस युग में भी हमारा गांव इंटरनेट से वंचित है। बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर करवाए।

सरयांज में लगे निजी कंपनी के टाॅवर का भी नही पहुंच पाता सिग्नल

जानकारी के अनुसार वर्ष 1985, 86 में विकास खंड कुनिहार की ग्राम पंचायत सूरजपुर से कुछ क्षेत्र काटकर ग्राम पंचायत सरयांज बनाई गई थी। उक्त पंचायत लगभग तीन से चार किलो मीटर तक चारों दिशाओं में फैली हुई है। पंचायत के अंतर्गत आने वाले अधिकतर गांव दूरदराज में फैले हुए है। ग्रामीणों की मांग पर वर्ष 2005, 06 में सरयांज में एक निजी कंपनी का टाॅवर लगा दिया गया। लेकिन उक्त टाॅवर का सिग्नल पंचायत के अधिकतर गाँव तक नही पंहुच पा रहा है। जबकि सरयांज में बैंक शाखा के अतिरिक्त पंचायत घर भी है। इंटरनेट कमजोर होने की वजह से कई ऑनलाइन कार्य पूरी तरह से प्रभावित पड़ जाते है।


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