ठियोग कॉलेज में 1.80 करोड़ का घोटाला, विजलेंस ने दर्ज की ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर

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विजिलेंस ने ठियोग स्थित राजकीय डिग्री कॉलेज में 1.82 करोड़ की लागत से बने एससी-एसटी ब्वॉयज हॉस्टल के निर्माण में हुए घोटाले की शिकायत पर एक ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। माना जा रहा है कि जल्द मामले में भवन निर्माण करने वाली एजेंसी हिमुडा के कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। हॉस्टल का निर्माण हिमुडा ने ठेकेदार से करवाया था। प्रारंभिक जांच में ठेकेदार और हिमुडा के अफसरों की मिलीभगत सामने आई है। दरअसल, राज्य विजिलेंस ब्यूरो को पिछले साल फरवरी में एक शिकायत मिली थी। इसमें ठेकेदार और हिमुडा के अधिकारियों की मिलीभगत से हॉस्टल के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान न रखने के आरोप लगाए गए थे।

मामले की जांच विजिलेंस की दक्षिण रेंज की टीम ने की और जांच के आरोप सही पाए गए। जांच के दौरान पता चला कि ठेकेदार गिरीश गुप्ता को नेगोसिएशन कमेटी ने डेढ़ साल में हॉस्टल निर्माण करने के लिए 1.82 करोड़ के काम के बदले 2.05 करोड़ दिए, जिसमें 1.95 करोड़ का सिविल वर्क शामिल था। पता चला कि दस्तावेजों में ठेकेदार और हिमुडा के अधिकारियों ने मिलीभगत कर गलत आंकड़े भी दर्ज किए, जिसकी वजह से ठेकेदार को सरकारी खजाने से 1.81 करोड़ का गलत पैसा जारी किया गया। जांच रिपोर्ट में ठेकेदार के अलावा हिमुडा के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई। रिपोर्ट के आधार पर ब्यूरो ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।

पांच मंजिला भवन में खंभों से लेकर दीवारों और बीम में 80 फीसदी दरारें मिलीं
जांच के दौरान पता चला कि ठियोग के विधायक की मुख्यमंत्री कार्यालय में गठित गुणवत्ता निगरानी सेल को मिली शिकायत पर एक जांच कराई गई, जिसमें 2017 में निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय में भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया गया। साथ ही पांच मंजिला भवन में खंभों से लेकर दीवारों और बीम तक पर अस्सी से ज्यादा जगह बड़ी दरारें भी पाई गई थीं। इसकी वजह से नए बने भवन का उपयोग भी कॉलेज ने नहीं किया। आईआईटी मंडी की स्ट्रक्चरल सेफ्टी रिपोर्ट में भी निर्माण की गुणवत्ता में कमी की पुष्टि हुई।

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