नई दिल्ली: भारतीय स्टेट बैंक के करोड़ों ग्राहकों के लिए एटीएम सेवाएं अब महंगी हो गई हैं। बैंक ने एक दिसंबर से अपने एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीन शुल्क में संशोधन किया है। यह बदलाव इंटरचेंज फीस में वृद्धि को देखते हुए किया गया है। सैलरी और सेविंग खाताधारकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
इस साल फरवरी में भी शुल्क में बदलाव किया गया था। नए नियमों के तहत दूसरे बैंक के एटीएम पर मासिक पांच मुफ्त लेनदेन के बाद नकद निकासी शुल्क बढ़ा है। अब यह शुल्क इक्कीस रुपये के बजाय तेईस रुपये प्रति लेनदेन होगा। गैर-वित्तीय लेनदेन पर भी शुल्क बढ़ाया गया है।
एसबीआई के अपने एटीएम पर बड़ा बदलाव
एक बड़ाबदलाव एसबीआई के अपने एटीएम नेटवर्क पर आया है। पहले यहां लेनदेन की कोई सीमा नहीं थी। अब बैंक ने इसे प्रति माह दस मुफ्त लेनदेन तक सीमित कर दिया है। इस सीमा के बाद हर नकद निकासी पर तेईस रुपये का शुल्क लगेगा। अन्य लेनदेन के लिए ग्यारह रुपये का शुल्क देना होगा।
बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस शुल्क पर जीएसटी अलग से लागू होगी। यह बदलाव एक दिसंबर से प्रभावी हो चुका है। बैंक का कहना है कि बढ़ी हुई इंटरचेंज फीस ने परिचालन लागत बढ़ा दी है। इसी वजह से यह समायोजन जरूरी था।
किन ग्राहकों को मिली राहत?
हालांकि,नए टैरिफ प्लान में कुछ ग्राहक श्रेणियों के लिए राहत बरकरार है। बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट खाताधारकों के लिए सेवा शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह एक महत्वपूर्ण छूट है जो छोटे खाताधारकों को लक्षित करती है।
इसके अलावा, कार्ड रहित नकद निकासी की सुविधा अभी भी पूरी तरह मुफ्त है। ग्राहक वनो ऐप जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। यहां कोई लेनदेन सीमा भी नहीं लगाई गई है। यह बैंक की डिजिटल पहल को बढ़ावा देने का प्रयास है।
एसबीआई डेबिट कार्ड का उपयोग करने वालों के लिए भी सेवा शुल्क वही रहेगा। हां, अब उन पर भी दस लेनदेन की मासिक सीमा लागू होगी। इसका मतलब है कि पुराने शुल्क दरों पर केवल दस लेनदेन ही मुफ्त होंगे। इसके बाद नए बढ़े हुए शुल्क लागू होंगे।
ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
ग्राहकोंको अपने मासिक एटीएम लेनदेन पर नजर रखनी चाहिए। मुफ्त सीमा के भीतर लेनदेन करने से अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सकता है। कार्ड रहित नकद निकासी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह न केवल मुफ्त है बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहतर माना जाता है।
बैंकिंग लागत में यह वृद्धि एक राष्ट्रव्यापी प्रवृत्ति का हिस्सा लगती है। कई अन्य बैंक भी पिछले कुछ समय में सेवा शुल्क में समायोजन कर चुके हैं। यह वित्तीय संस्थानों के लिए राजस्व का एक स्रोत है। साथ ही, बढ़ती परिचालन लागत को पूरा करने का जरिया भी है।
अधिक जानकारी के लिए ग्राहक एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। वहां शुल्क संरचना का विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध है। बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र से भी संपर्क किया जा सकता है। यह बदलाव सभी प्रकार के बचत और सैलरी खातों पर लागू होता है।

