Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के सतना से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। एक निजी स्कूल में यूकेजी की छह वर्षीय बच्ची के साथ शिक्षिका ने मारपीट की। होमवर्क पूरा न करने पर लगे थप्पड़ से बच्ची का हाथ फ्रैक्चर हो गया। पुलिस ने पिता की शिकायत पर मामला दर्ज किया है।
यह घटना सतना शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के एक निजी स्कूल में हुई। बच्ची के पिता ने बताया कि घर में छोटी बेटी का जन्मदिन था। इस उत्सव के कारण बच्ची अपना अंग्रेजी का होमवर्क पूरा नहीं कर पाई। इसी बात पर शिक्षिका ने उसे थप्पड़ मारा।
थप्पड़ से बच्ची गिरी, हाथ में आई चोट
मंगलवार को शिक्षिका सपना खरे ने बच्ची की कॉपी चेक की। होमवर्क अधूरा देखकर वह क्रोधित हो गईं। उन्होंने बच्ची को जोरदार थप्पड़ मारा। यह थप्पड़ इतना तेज था कि बच्ची का संतुलन बिगड़ गया। वह जमीन पर गिर पड़ी और उसके हाथ में गंभीर चोट आई।
बच्ची डर के मारे स्कूल में कुछ नहीं बोल पाई। घर पहुंचने पर उसने सिर्फ हाथ में दर्द की शिकायत की। माता-पिता ने मामूली चोट समझकर दर्द निवारक दवा लगाई। पूरी रात बच्ची दर्द से कराहती रही। सुबह उसका हाथ बुरी तरह सूज गया।
परिजन बच्ची को तुरंत जिला अस्पताल ले गए। वहां एक्स-रे में हाथ के फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने तत्काल बच्ची के हाथ पर प्लास्टर चढ़ाया। अब बच्ची का इलाज चल रहा है। वह इस सदमे से उबरने की कोशिश कर रही है।
पिता ने की पुलिस में शिकायत
बच्ची के हाथ में प्लास्टर देखकर पिता का गुस्सा फूट पड़ा। वे सीधे स्कूल पहुंचे और प्राचार्य से शिकायत की। उन्होंने कक्षा का सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की। स्कूल प्रबंधन ने बताया कि कैमरा कई दिनों से खराब है।
परिजनों का आरोप है कि स्कूल में बच्चों के साथ हिंसा की जाती है। इससे पहले भी फीस देर से जमा करने पर बच्ची को परीक्षा से वंचित रखने की धमकी दी गई थी। पिता ने स्थानीय पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।
सिविल लाइन थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने शिक्षिका सपना खरे के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कहा कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
बाल अधिकार संगठनों ने जताई चिंता
इस घटना ने स्थानीय बाल अधिकार संगठनों का ध्यान खींचा है। उन्होंने शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठनों का कहना है कि ऐसी घटनाएं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों ने भी इस मामले पर गंभीर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि शिक्षा का माहौल डरमुक्त होना चाहिए। शारीरिक दंड बच्चों के विकास के लिए हानिकारक है। इससे उनका आत्मविश्वास कमजोर होता है।
जिला प्रशासन ने इस मामले में दखल दिया है। शिक्षा अधिकारी स्कूल की जांच कर रहे हैं। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा है। अगर आरोप सही पाए गए तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बच्ची के इलाज और कानूनी प्रक्रिया
बच्ची का इलाज सतना जिला अस्पताल में जारी है। डॉक्टर उसकी नियमित निगरानी कर रहे हैं। हाथ का फ्रैक्चर ठीक होने में कई सप्ताह लग सकते हैं। बच्ची को मनोवैज्ञानिक सहायता की भी आवश्यकता है।
पुलिस जांच में स्कूल के अन्य बच्चों और स्टाफ से पूछताछ की जा रही है। आरोपी शिक्षिका से भी पूछताछ की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाई जाएगी।
यह मामला एक बार फिर स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाली हिंसा को उजागर करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षकों को वैकल्पिक अनुशासन तकनीक सीखनी चाहिए। बच्चों के साथ संवाद और समझ से ही बेहतर परिणाम मिलते हैं।
