Uttar Pradesh News: संभल हिंसा मामले में पुलिस प्रशासन को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. स्थानीय अदालत ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने पुलिस को सात दिनों के अंदर मुकदमा दर्ज कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है. यह आदेश पुलिस की गोली से घायल हुए एक युवक के पिता की याचिका पर आया है.
घायल बेटे का छिपकर कराया इलाज
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पिता ने बताया कि हिंसा के दौरान पुलिस ने उनके बेटे को गोली मारी थी. डर के कारण उन्हें अपने बेटे का इलाज छिपकर कराना पड़ा था. कोर्ट में सुनवाई के दौरान ऑपरेशन और शरीर से निकली गोली की रिपोर्ट बतौर सबूत पेश की गई. पिता ने कहा कि उनका बेटा सिर्फ अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए घर से निकला था.
एसपी बोले- हम नहीं दर्ज करेंगे केस
कोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस का रुख सख्त है. संभल के एसपी कृष्ण बिश्नोई ने कहा कि इस मामले में पहले ही ज्यूडिशियल इंक्वायरी हो चुकी है. उस जांच में पुलिस की कार्रवाई को सही माना गया था. एसपी ने साफ किया कि अभी मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा. पुलिस प्रशासन कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेगा.
पीड़ित को ही बना दिया था आरोपी
पीड़ित पक्ष के वकील कमर आलम ने बताया कि यह फैसला लंबी कानूनी लड़ाई का नतीजा है. याचिका 4 फरवरी 2025 को दायर की गई थी. इस पर 15 बार से ज्यादा बहस हुई. आलम ने बताया कि याचिका दायर करने के बाद पुलिस ने पीड़ित को ही हिंसा के एक मामले में आरोपी बना दिया था. वह अभी भी कानूनी पचड़े में फंसा है. वकील ने उम्मीद जताई है कि अब निष्पक्ष जांच हो सकेगी.
नवंबर हिंसा में गई थीं 5 जान
संभल में पिछले साल नवंबर में हुई हिंसा काफी भयानक थी. इसमें कुल पांच लोगों की मौत हुई थी. उस वक्त भी मृतकों के परिजनों ने पुलिस की गोलीबारी को मौत की वजह बताया था. हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने दावा किया था कि उनकी गोली से किसी की जान नहीं गई. अब कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
