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संत कबीर दास: योगी आदित्यनाथ ने सादगी और कर्म की शिक्षाओं को बताया आज भी प्रासंगिक

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत कबीर दास की शिक्षाओं को आज के युग में भी उतना ही प्रासंगिक बताया है। लखीमपुर खीरी के कबीरधाम आश्रम में आयोजित एक स्मृति महोत्सव में उन्होंने जनता से कबीर के संदेशों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने की अपील की। उन्होंने सादगी, समानता और अच्छे व्यवहार पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत कबीर दास ने निर्गुण भक्ति का मार्ग दिखाया। उन्होंने अपने सीधे और बेबाक दोहों के माध्यम से आम लोगों को आत्मा और परमात्मा के मिलन का सरल अर्थ समझाया। उनकी शिक्षाएं स्थानीय भाषा में थीं जिससे लोग आसानी से जुड़ सके। आदित्यनाथ ने कबीरधाम आश्रम की स्थापना करने वाले संतों को भी श्रद्धांजलि दी।

आदित्यनाथ ने कबीर दास के एक विशेष दोहे का उल्लेख करते हुए उसकी सार्वभौमिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में यह दोहा संतोष का महत्वपूर्ण संदेश देता है। इस दोहे में ईश्वर से इतनी दौलत मांगी गई है जिससे परिवार का गुजारा हो सके और कोई भूखा न रहे।

कर्म को जीवन का केंद्र बताया

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि संत कबीर दास ने तुलसीदास जैसे अन्य संतों की तरह कर्म को जीवन का केंद्रीय बिंदु बताया। उनकी शिक्षाओं के अनुसार अच्छे कर्मों से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं बुरे कर्म दुख का कारण बनते हैं। कोई भी व्यक्ति अपने किए गए कर्मों के परिणाम से बच नहीं सकता है।

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उन्होंने आगे कहा कि कबीर का जीवन ही उनकी शिक्षाओं का सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने धार्मिक कट्टरता और रूढ़िवादिता को चुनौती दी। अपने अंतिम दिनों में उन्होंने काशी को छोड़कर मगहर जाने का निर्णय लिया। उस समय मगहर की मृत्यु को नरक की प्राप्ति से जोड़कर देखा जाता था।

सामाजिक बुराइयों का विरोध

संत कबीर दास ने जातिगत भेदभाव और छुआछूत का सदैव विरोध किया। वे इन्हें समाज में गिरावट और फूट का मुख्य कारण मानते थे। उनकी शिक्षाओं ने समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। उस दौर में जाति और पंथ के आधार पर समाज बंटा हुआ था।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कबीर दास के साथ-साथ गुरु रामानंद और गुरु रविदास ने भी समाज को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई। इन संतों की शिक्षाएं समय और परिस्थितियों से परे हैं। ये शाश्वत सिद्धांतों पर आधारित हैं इसलिए आज भी उतनी ही मूल्यवान हैं।

मुख्यमंत्री ने कबीर द्वारा मगहर जाने के निर्णय को एक साहसिक कदम बताया। उन्होंने इसके माध्यम से यह सिद्ध किया कि स्वर्ग या नर्क की प्राप्ति किसी स्थान विशेष से नहीं होती। यह तो व्यक्ति के अपने कर्मों पर निर्भर करता है। आज मगहर शांति का प्रतीक बन चुका है।

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आंतरिक सुधार पर जोर

आदित्यनाथ ने कहा कि हर समाज में अच्छाइयां और कमियां दोनों विद्यमान रहती हैं। संतों की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर हमें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। इससे मिली सीख के द्वारा हम अपनी कमियों को दूर कर सकते हैं। इससे समाज और देश की भलाई के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों को बल मिलेगा।

उन्होंने कबीर परंपरा को जीवित रखने वाले सभी अनुयायियों का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने इस बात पर संतोष जताया कि कबीर का संदेश आज भी लोगों तक पहुंच रहा है। उनकी वाणी आज भी उतनी ही प्रभावशाली है। यह शिक्षा हमें सही मार्ग दिखाती है।

योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कबीर की वाणी के माध्यम से लोगों को जीवन जीने की कला सीखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सादगी और अच्छे व्यवहार से ही सच्चा सुख प्राप्त किया जा सकता है। भौतिक संपदा की अंधी दौड़ व्यक्ति को कभी संतुष्ट नहीं कर सकती।

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