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दोस्त भारत ने झटका दिया तो हिल गई रूस की अर्थव्यवस्था, अब सोना बेचने की आई नौबत

Moscow News: पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने रूसी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। तेल और गैस से होने वाली कमाई महामारी के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस आर्थिक संकट से निपटने के लिए रूस अब अपना ‘सोना’ बेचने को मजबूर हो गया है। मॉस्को अपने नेशनल वेल्थ फंड (NWF) से विदेशी मुद्रा और सोने की रिकॉर्ड बिक्री करने जा रहा है। यह कदम ऐसे वक्त उठाया जा रहा है, जब रूस के सबसे भरोसेमंद दोस्त भारत ने भी तेल खरीदने से हाथ पीछे खींच लिए हैं।

सोने और करेंसी की रिकॉर्ड बिक्री

रूसी वित्त मंत्रालय ने आर्थिक भरपाई के लिए बड़ा फैसला लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 16 जनवरी से 5 फरवरी के बीच सरकार रोजाना 12.8 अरब रूबल (करीब 165 अरब डॉलर) का सोना और चीनी युआन बेचेगी। यह बिक्री कुल मिलाकर 192.1 अरब रूबल तक पहुंचेगी। इंटरफैक्स की रिपोर्ट बताती है कि यह अब तक की सबसे बड़ी बिक्री होगी। यह आंकड़ा कोविड-19 महामारी के दौरान बेची गई संपत्ति (11.4 अरब रूबल रोजाना) से भी ज्यादा है।

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कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट

इस संकट का मुख्य कारण रूसी कच्चे तेल की कीमतों का गिरना है। दिसंबर में तेल की कीमत गिरकर औसतन 39 डॉलर प्रति बैरल रह गई थी। जबकि, 2026 का बजट बनाते समय सरकार ने इसके 59 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया था। अल्फा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट नतालिया ओर्लोवा ने चेतावनी दी है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए इस साल भी तेल-गैस की कमाई पर भारी दबाव रहेगा।

60 फीसदी गोल्ड रिजर्व हुआ खाली

रूस का खजाना तेजी से खाली हो रहा है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले नेशनल वेल्थ फंड (NWF) के पास 113.5 अरब डॉलर की लिक्विड संपत्ति थी। इसमें 405 मीट्रिक टन सोना भी शामिल था। सरकार ने पिछले चार सालों में फंड का करीब 60 फीसदी सोना बेच दिया है। दिसंबर 2025 तक यह गोल्ड होल्डिंग घटकर मात्र 173 मीट्रिक टन रह गई। अब फंड में केवल 52.9 अरब डॉलर की लिक्विड एसेट्स बची हैं।

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भारत ने घटाई तेल की खरीदारी

रूस के लिए सबसे बड़ा झटका भारत का रुख बदलना रहा है। युद्ध की शुरुआत में भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना था। लेकिन अब भारतीय रिफाइनरियों ने खरीदारी में भारी कटौती कर दी है। इसके पीछे अमेरिका का दबाव एक बड़ी वजह है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने पर भारत पर कड़े टैक्स की धमकी दी थी। ट्रंप ने पहले ही भारतीय सामानों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 फीसदी तक पहुंचा दिया है।

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