New Delhi Business News: दिग्गज उद्योगपति Mukesh Ambani की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने एक बड़े दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा गया था कि रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल की बड़ी खेप पहुंच रही है। कंपनी ने इसे पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने पर भारत के खिलाफ कड़े टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है।
रिलायंस ने बताया क्या है सच?
Mukesh Ambani के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी ने कहा कि पिछले तीन हफ्तों में जामनगर रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल की कोई भी डिलीवरी नहीं हुई है। इतना ही नहीं, कंपनी ने साफ किया कि जनवरी महीने में भी रूस से ऐसी कोई खेप आने की उम्मीद नहीं है। रिलायंस ने मीडिया रिपोर्ट्स पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ‘फेयर जर्नलिज्म’ का दावा करने वालों ने तथ्यों की जांच नहीं की।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट पर मचा था बवाल
यह पूरा विवाद ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रूसी क्रूड ऑयल से भरे तीन जहाज Mukesh Ambani की कंपनी की रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं। गुजरात के जामनगर में रिलायंस दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स चलाती है। कंपनी ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि उन्होंने जनवरी में डिलीवर होने वाले किसी भी रूसी तेल को नहीं खरीदा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने दी है टैरिफ की धमकी
रिलायंस की यह सफाई अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद आई है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को धमकी दी थी कि अगर भारत रूसी तेल के मुद्दे पर सहयोग नहीं करता, तो उस पर आयात शुल्क (टैरिफ) और बढ़ाया जाएगा। ट्रंप का मानना है कि भारत डिस्काउंट पर रूसी तेल खरीदकर मुनाफा कमा रहा है और इस पैसे का इस्तेमाल रूस युद्ध में कर रहा है। ट्रंप पहले ही भारत पर टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% कर चुके हैं।
भारत में घट रहा रूसी तेल का आयात
आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी दबाव का असर दिख रहा है। ग्लोबल फर्म केपलर (Kpler) के मुताबिक, भारत में रूसी तेल की सप्लाई में भारी गिरावट आई है। यह दिसंबर में गिरकर 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) रह गई है, जो तीन साल का निचला स्तर है। यह जून के मुकाबले करीब 40 फीसदी कम है। Mukesh Ambani की कंपनी पिछले साल रूसी तेल की सबसे बड़ी खरीदार थी, लेकिन अब कंपनी ने अपनी रणनीति बदल ली है।
