कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप और लोन मोराटोरियम पर ब्याज पर ब्याज ना लेने के फैसले के कारण बैंकों को हुए नुकसान की वजह से डॉलर के मुकाबले रुपया ऐतिहासिक 75 रुपए के नीचे चला गया है। वहीं इकोनॉमी में बड़ती अनिश्चितता और महंगाई भी इसका एक बड़ा कारण है। जानकारों की मानें तो इसकी वजह से आम लोगों के लिए मुश्किलें बढऩे वाली हैं। खासकर इंपोर्ट होने वाले सभी सामान महंगे हो जाएंगे। वहीं देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भी असर देखने को मिलेगा।

रुपए में आई ऐतिहासिक गिरावट
आज करेंसी मार्केट में डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट देखने को मिल रही है। मौजूदा समय 4 बजकर 45 मिनट पर रुपया 0.53 फीसदी की गिरावट के साथ रुपया 75.21 रुपए से नीचे आ गया है। जानकारों की मानें तो इससे पहले रुपए का यह स्तर अगस्त 2020 में था। यानी डॉलर के मुकाबले रुपया 9 महीने के निचले स्तर पर चला गया है। अब तक रुपए में सबसे ज्यादा गिरावट 77 रुपए की है, जोकि मार्च 2020 में देखने को मिली थी। जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 77 रुपए के निचले स्तर को भी पार कर सकता है।

आम लोगों के लिए बढ़ेगी मुश्किलें
आईआईएफएल के वाइस प्रेसीडेंट ( कमोडिटी एंड करेंसी ) अनुज गुप्ता का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपए में आने वाले दिनों में और भी गिरावट देखने को मिल सकती है। यह स्तर 77 रुपए के पार भी जा सकता है। इससे आम लोगों को थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता हैै। उनका कहना है कि देश के बाहर से आने वाला सामान महंगा हो जाएगा। विदेश में पढ़ाई करना महंगा हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर विदेशी मुद्रा भंडार में भी गिरावट देखने को मिलेगी। क्योंकि इंपोर्टिड सामान के लिए आपको ज्यादा डॉलर चुकाने होंगे।

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