Rupee Hits All-Time Low: ईरान युद्ध के चलते रुपया 92.62 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर, तेल की कीमतों ने तोड़ी कमर

Business News: भारतीय रुपये (INR) के लिए बुधवार (18 मार्च) का दिन ऐतिहासिक रूप से खराब साबित हुआ। मिडिल ईस्ट में जारी ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी और विदेशी फंडों की लगातार निकासी के चलते रुपया शुरुआती कारोबार में 92.62 प्रति डॉलर के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर जा गिरा।

युद्ध ने रुपये को अन्य मुद्राओं से ज्यादा पहुंचाया नुकसान

ईरान युद्ध शुरूहोने के बाद से रुपये में 1.5% से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। तुलनात्मक रूप से देखें तो इसी अवधि में चीन का युआन (Yuan) केवल 0.2% और सिंगापुर डॉलर 0.8% गिरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल के आयात पर भारत की भारी निर्भरता की वजह से रुपया अन्य एशियाई मुद्राओं के मुकाबले अधिक दबाव झेल रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में 40% का उछाल

युद्ध शुरूहोने के बाद से ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में करीब 40% का उछाल आया है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश का आयात बिल (Import Bill) बढ़ गया है। इससे डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपये की वैल्यू लगातार कम हुई है।

चीन के पास तेल भंडार का फायदा, भारत पिछड़ा

बार्कलेज(Barclays) के एशिया मैक्रो स्ट्रैटेजी हेड मित्तल कोटेचा के अनुसार, इस युद्ध का असर चीन और भारत पर अलग-अलग दिख रहा है। चीन के पास लगभग 1.2 बिलियन बैरल का विशाल कच्चा तेल भंडार (Reserves) है। इसके अलावा, मई 2025 से अब तक युआन रुपये के मुकाबले 15% मजबूत हो चुका है, जिससे चीन को तेल के झटके से निपटने में आसानी हो रही है जबकि भारत को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

रुपये के सामने 92.70 का स्तर चुनौती

एक्सपर्ट्स कामानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल सप्लाई रुकने की आशंका और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर आने वाले फैसले ने बाजार को डरा दिया है। फिलहाल रुपया 91.95 से 92.65 के दायरे में रह सकता है। डॉलर की आक्रामक मांग और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते रुपये के सामने 92.70 का स्तर कड़ी चुनौती बन गया है।

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