India News: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने भारतीय रुपये की कमर तोड़ दी है। बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे की भारी गिरावट के साथ 92.58 के अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर बंद हुआ। विदेशी बाजारों में डॉलर की मजबूती और भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा बाहर निकालने से स्थिति और बिगड़ गई है। इस बीच, दिग्गज अमेरिकी फर्म गोल्डमैन सैक्स की भविष्यवाणी ने सबकी नींद उड़ा दी है। फर्म का अनुमान है कि रुपया इस साल 95 के स्तर तक भी गिर सकता है।
कच्चे तेल और ग्लोबल संघर्ष का दोहरा वार
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष ने ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता पैदा कर दी है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय बाजार के सेंटिमेंट को कमजोर कर दिया है। बुधवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया डॉलर के मुकाबले 92.42 पर खुला था। शुरुआती कारोबार में यह थोड़ा संभला, लेकिन दबाव के चलते फिसलकर 92.58 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। मंगलवार को भी रुपया 92.40 के स्तर पर बंद हुआ था, जो उस समय का रिकॉर्ड निचला स्तर था।
गोल्डमैन सैक्स ने घटाया भारत की ग्रोथ का अनुमान
रुपये की गिरावट के बीच गोल्डमैन सैक्स ने भारत की आर्थिक सेहत को लेकर चिंता जताई है। फर्म ने इस साल के लिए भारत के विकास (Growth) अनुमान को 7% से घटाकर 6.5% कर दिया है। इसके अलावा, महंगाई दर में भी 30 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। गोल्डमैन सैक्स के मुख्य अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता का कहना है कि चालू खाता घाटा (CAD) भी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1.2% तक पहुंच सकता है।
आरबीआई और सरकार के अगले कदम पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को 92.50 के स्तर से नीचे जाने दिया, जिससे गिरावट तेज हुई। हालांकि, जानकारों का कहना है कि सरकार राजकोषीय नीति का इस्तेमाल कर रही है ताकि अर्थव्यवस्था को ऊर्जा संकट से बचाया जा सके। ऐसे में आरबीआई तुरंत ब्याज दरों में बदलाव शायद न करे, लेकिन बाजार में लिक्विडिटी सपोर्ट जरूर दे सकता है। आने वाले समय में बॉन्ड की सप्लाई बढ़ने का भी खतरा है, जो पूरी तरह से तेल की कीमतों और वैश्विक संघर्ष की अवधि पर निर्भर करेगा।


